हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अब स्नातक के विद्यार्थियों को फोटोयुक्त नई तकनीक की डिग्रियां देगा। वर्ष 2013 के बाद के स्नातक करने वाले सभी विद्यार्थियों को डिजिटल, पॉलीथलीन और टैरेपेथेलेट तकनीक से बनी डिग्रियां दी जाएंगी। इन्हें बनाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विवि साल 2013 के बाद प्रवेश लेने वाले स्नातक कक्षाओं के करीब 1,12, 062 विद्यार्थियों के लिए ऐसी डिग्री बनाने के ऑर्डर दे चुका है। इसके लिए इस कार्य में दक्ष कंपनियों के टेंडर कॉल कर दिए गए हैं। नई तकनीक से बनने वाले ये डिग्रियां पानी लगने से खराब नहीं होंगी।
साथ ही हर मौसम में सुरक्षित रहेंगी। ये सुरक्षा कारणों के चलते बार कोडिड और क्यूआर कोडिड होंगी। बीते साल प्रदेश विवि के 23वें दीक्षांत समारोह में ऐसी डिग्रियां पीएचडी और गोल्ड मेडल विजेता विद्यार्थियों को दी जा चुकी हैं। अब इन्हें स्नातक कक्षाओं में पूरी तरह से लागू किया जाएगा।
इससे पूर्व विवि 2013 के बाद प्रवेश लेने वाले बीएड छात्रों को पहले ही ऐसी नई सुरक्षित तकनीक से बनी डिग्री दे रहा है। विश्वविद्यालय इस बार होने वाले दीक्षांत समारोह में भी पीएचडी और गोल्ड मेडल विजेताओं को यही डिग्री देगा। स्नातक के बाद स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए भी इसी तरह की डिग्री खास तरह के पेपर पर तैयार कर छात्रों को देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
वर्तमान में दी जा रहीं पुरानी तकनीक की उपाधियां
मौजूदा समय में विवि स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों को पुरानी तकनीक की उपाधियां दे रहा है। बीएड कोर्स के लिए नई तकनीक इस्तेमाल की गई है। स्नातक के बाद अन्य कोर्स में भी भविष्य में ऐसी ही नई तकनीक की उपाधि दी जाएगी।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी ने माना कि नई तकनीक से बनी डिग्रियां सुरक्षित होंगी। इस पर पानी का कोई असर नहीं होगा। छेड़खानी और फर्जी डिग्री बनाना भी संभव नहीं होगा। इसमें बार कोड, क्यूआर कोड, छात्र की फोटो सहित कई अलग खासियतें है। स्नातक के सभी 2013 के बाद के छात्रों को इसे बनाकर दिया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया चल रही है।