एचपीयू के छात्रावासों को इस बार सर्दियों की डेढ़ माह की छुट्टियों में विवि प्रशासन पूरी तरह से बंद नहीं करेगा। इस दौरान जनजातीय क्षेत्र के छात्रों और शोधार्थियों को छात्रावास में ठहरने की पहले जैसे अनुमति रहेगी। नेट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी ठहरने की अनुमति रहेगी।
पढ़ाई करने वाले छात्रों को विवि प्रशासन पूरी सुविधा और सहयोग करेगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को विभागों से जरूर लिख कर लाना होगा कि वह कौन सी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, या किस प्रोजेक्ट पर कार्य करने के लिए सर्दियों में छात्रावास सुविधा लेगा।
विवि प्रशासन के पढ़ाकू छात्रों के लिए अपनाए गए इस नरम रुख के चलते शायद ही इस बार सर्दियों में छात्रावास बंद होने पर होने वाले हंगामे की नौबत आए। हालांकि विवि प्रशासन इस बार विवि के कुल 15 छात्रावासों में से तीन छात्रावासों को ही पूरी तरह से बंद करने की सोच रहा है।
इनमें मरम्मत किए जाने का कार्य चल रहा है। इनमें दो गर्ल्स विद्योत्तमा और आईटीएच और ब्वॉयज का जीएच डॉ. वाईएस परमार छात्रावास शामिल होगा।
चीफ वार्डन कार्यालय ने मांगी थी विभागों से सूची
विवि के चीफ वार्डन कार्यालय ने सर्दियों में छात्रावासों में ठहरने वाले जनजातीय क्षेत्र से संबंधित छात्रों और शोधार्थियों के अलावा कितने ऐसे छात्र होंगे, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रावास में ठहरने की अनुमति रहेगी। उसी के आधार पर चीफ वार्डन कार्यालय छात्र छात्राओं को ठहरने की अनुमति देगा।
छात्र की सुविधा देख मिलेगी अनुमति : प्रो. हरि मोहन
विवि के चीफ वार्डन प्रो. हरि मोहन शर्मा ने कहा कि फिलहाल छात्रावासों को बंद करने जैसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। विभागों से आई छात्रों के आवेदन के बाद भेजी सूची की छंटनी कर अगले दो से तीन दिन में सूची फाइनल कर दी जाएगी। जो छात्र सही मायने में पढ़ाई या तैयारियां करना चाहेंगे, उनके हित को देख फैसला ले लिया जाएगा। फिलहाल छात्रावासों को बंद करने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है।
15 छात्रावासों में ठहरते हैं करीब 1700 छात्र-छात्राएं
विवि के कुल 15 छात्रावासों में ग्यारह छात्राओं के है और चार छात्रों के छात्रावासों में करीब 1742 को छात्रावास सुविधा प्रदान की जा रही है। सर्दियों में जनजातीय क्षेत्र के छात्रों और शोधार्थियों सहित परीक्षा तैयारी को रहने वाले वाले छात्रों की संख्या करीब साढ़े पांच सौ तक ही बच जाती है।