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फेल कॉलेज छात्रों को बड़ी राहत, अब 45 अंक वाले भी होंगे पास

Thu, 08 Sep 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नवंबर 2015 में रूसा प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में फेल हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी गई है। फेल हो चुके विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन और थियोरी में संयुक्त रूप से कुल 45 अंक हुए तो भी उन्हें पास घोषित कर दिया जाएगा।
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दस दिन में 17 सितंबर तक हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) संशोधित नतीजे घोषित करेगा। खराब नतीजे पर जांच कमेटी की रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के बाद यह फैसला बुधवार को सचिवालय में कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी की अध्यक्षता में प्रधान सचिव शिक्षा के कार्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

बैठक में भविष्य के लिए भी यूजी की रूसा सेमेस्टर परीक्षाओं में पास होने के लिए न्यूनतम प्राप्तांक में दस फीसदी घटाने पर सहमति बनी। सहमति के मुताबिक विद्यार्थी को कुल 45 अंक लेने ही होंगे। इंटरनल असेसमेंट और थियोरी में न्यूनतम 35 फीसदी अंक लेने अनिवार्य होंगे। पहले यह 45 फीसदी थे।
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बैठक में लिए दो बड़े फैसले

बता दें कि बैठक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बुलाई थी लेकिन वह किन्हीं कारणों से नहीं आ पाए। बैठक में प्रधान सचिव शिक्षा आरडी धीमान, उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी, विधायक एवं ईसी सदस्य बंबर ठाकुर, विवि के कुल सचिव डॉ. पंकज ललित, विवि डीएस प्रो. गिरिजा शर्मा, डीन प्लानिंग प्रो. एमएस चौहान, विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी, कंप्यूटर सेंटर प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार, ईसी सदस्य राजकुमारी आदि मौजूद रहे।

हाल ही में घोषित यूजी के सीबीसीएस (रूसा) 2015 के  तीसरे बैच के पहले सेमेस्टर परीक्षा परिणामों में विद्यार्थियों को सत्रांत परीक्षा (टर्म एंड) और आंतरिक मूल्यांकन (आईए) में संयुक्त रूप से 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर उत्तीर्ण घोषित किया जाएगा। यह निर्णय केवल नवंबर 2015 में आयोजित प्रथम सत्र के विद्यार्थियों के लिए एक बार ही लागू होगा।

भविष्य में यूजी की होने वाली सेमेस्टर परीक्षा में छात्रों को सेमेस्टर अंत की थियोरी परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन दोनों में 70:30 के अनुपात में अलग-अलग 35 प्रतिशत और संयुक्त रूप से 45 प्रतिशत अंक लेने अनिवार्य होंगे।
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पहले फेल हो गए थे 98 फीसदी छात्र

नवंबर 2015 में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में नए लागू किए गए अंक विभाजन और पास प्रतिशतता की 45 फीसदी की शर्त के कारण 98 फीसदी विद्यार्थी फेल हो गए। विद्यार्थी इंटरनल असेसमेंट में 30 में से और थियोरी परीक्षा में 70 में से 45-45 फीसदी अंक की शर्त पूरी नहीं कर पाए।

नतीजे घोषित होने के बाद प्रदेश भर के कॉलेजों और राज्य विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। फेल हुए छात्रों ने विश्वविद्यालय पहुंचकर धरने-प्रदर्शन किए।
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