संजय शर्मा, आवाम संस्था के चेयरमैन जग्गू नौरिया, उपाध्यक्ष प्रीतम, सचिव सुरेंद्र, ग्लोबल के चेयरमैन कमल राणा, हार्म संस्था के चेयरमैन संजय जंबाल, उदय संस्था के चेयरमैन जोगिंद्र राणा, बेटी संस्था के उमेश कटोच, राजपूत सभा के सदस्य शशिपाल भंगालिया, श्रीकंठ सहित शिवा महिला मंडल पालमपुर की पूनम
बाली, सुनीता, रेश्मा, लता, सुरिंद्रा, गरीब, पुष्पा, राधा, निर्मला, चंद्रमणी और सुमन ने कहा कि जूठन स्वर्गीय ओमप्रकाश बाल्मीकि के व्यक्तिगत अनुभवों का संग्रह है। इसमें छुआछूत पर लेखक के अनुभवों को बताया गया है, जबकि कई प्रतिबंधित जातिसूचक शब्दों का प्रयोग है।
वर्तमान में देश में ऐसा कुछ नहीं है। ऐसे में कॉलेज के विद्यार्थियों को जूठन पढ़ाए जाने से बच्चों के बीच मतभेद पैदा हो रहा है। साथ ही एक-दूसरे के प्रति जातिगत आधार पर द्वेष की भावना भी पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि वे पुस्तक जूठन का कतई विरोध नहीं करते हैं।
न ही महाविद्यालयों में दलित साहित्य पढ़ाने का विरोध करते हैं, लेकिन महाविद्यालयों में पढ़ाया जाने वाले दलित साहित्य की समीक्षा हो। महाविद्यालय में ऐसा दलित साहित्य नहीं पढ़ाया जाना चाहिए, जिससे कि देश की एकता और अखंडता पर असर पड़े। बल्कि ऐसा दलित साहित्य पढ़ाया जाए, जिससे कि देश के युवाओं को एकजुटता में पिरोने का संदेश हो।