हिमाचल में क्लास वन और टू की भर्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए बनाई गई नई चयन प्रक्रिया पर रोक लगने से प्रदेश के युवाओं में गुस्सा है। तीन माह पूर्व लिए गए फैसले को वापस लेने पर सोशल मीडिया में सरकार और लोकसेवा आयोग के खिलाफ जमकर गुबार निकाला जा रहा है। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और आयोग अध्यक्ष से इस रोक को हटाने की मांग के लिए युवाओं ने ई-मेल भेज कर अपना विरोध जताने का अभियान भी शुरू किया है। लिखित परीक्षा के अंकों का महत्व खत्म होने और इंटरव्यू के माध्यम से ही नौकरियां देने के फैसले को भ्रष्टाचार से जोड़ा जा रहा है। सोशल मीडिया पर युवाओं ने शुक्रवार सुबह से इस मुद्दे को गरमाया हुआ है। कमेंट बॉक्स में कई युवाओं ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।
युवा लिख रहे हैं कि लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष ने एक बड़ी पहल करते हुए 1971 में बनी चयन प्रक्रिया को बदल कर क्रांतिकारी बदलाव लाया था। इस फैसले युवा बहुत अधिक उत्साहित थे। नौकरी देने में भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद की प्रथा खत्म होने की आस जगी थी लेकिन इस फैसले पर रोक लगने से स्पष्ट है कि चहेतों को नौकरियां देने में आ रही मुश्किलों के चलते ऐसा किया गया है। कुछ युवाओं ने इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग भी की है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के युवाओं ने भी सोशल मीडिया पर इस बाबत एक अलग पेज तैयार कर विरोध करना शुरू किया है। गुरुवार को लोकसेवा आयोग ने अपने पुराने फैसले पर रोक लगाते हुए भविष्य में की जाने वाली भर्तियों में इंटरव्यू के अंकों के आधार पर ही चयन करने का फैसला लिया है।