फल एवं सब्जी मंडियों में आढ़तियों का कमीशन पांच से घटाकर दो फीसदी करने की प्रदेश सरकार की तैयारियों के बाद आढ़ती एसोसिएशन शिमला भड़क गई है। बुधवार को एसोसिएशन ने आपात बैठक बुलाकर कमीशन में कटौती के सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा की। एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ठाकुर ने बताया कि आढ़ती किसान-बागवानों और खरीदारों के बीच कड़ी का काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार आढ़तियों के शोषण पर उतारू हो गई है।
अगर तीन दिन के भीतर सरकार ने आढ़तियों की कमीशन में कटौती न करने का फैसला नहीं लिया तो पूरे प्रदेश के आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसे लेकर परवाणू से लेकर प्रदेश की सभी आढ़ती एसोसिएशनों से बात कर एक राय बना दी गई है। हड़ताल से किसानों-बागवानों को फसल बेचने में पेश आने वाली समस्या के लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेवार होगी।
हरीश ठाकुर ने बताया कि जब सरकार नियमित अंतराल पर कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का फैसला लेती है तो आढ़तियों की कमीशन घटने का फैसला न्यायसंगत कैसे हो सकता है। कमीशन को 5 से बढ़ा कर 6 फीसदी किया जाना चाहिए। एसोसिएशन का दावा है कि कच्चे फलों का पूरा कारोबार उधारी पर चलता है। आढ़तियों के करोड़ों रुपये खरीदारों के पास फंसे होते हैं।
हिमाचल में आढ़तियों की कमीशन देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे कम है। अन्य राज्यों में फलों पर आढ़ती 8 से 10 फीसदी कमीशन लेते हैं। कमीशन किसानाें-बागवानों से नहीं, बल्कि खरीदारों से ली जाती है। बैठक में आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य अमन सूद, गिरीश चौहान, प्रताप चौहान, नरेंद्र ठाकुर, ओम प्रकाश, कृष्ण करोल और मनीष चौधरी सहित अन्य आढ़ती मौजूद रहे।