हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के कुलपति और निदेशक अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा केंद्र को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाबतलब किया है। अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा केंद्र के माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय में रहने की व्यवस्था करने के आग्रह को लेकर आए मामले में हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किए।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कपूर और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेने के बाद यह आदेश पारित किए। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र में यह कहा गया है कि करीब 28 हजार छात्र दूरवर्ती शिक्षा केंद्र के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं।
उन्हें कुछ दिन के लिए लेक्चर अटेंड करने के लिए विश्वविद्यालय में आना पड़ता है। विश्वविद्यालय में रहने की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। पत्र में कहा गया है कि प्रार्थी की तरह कई गरीब छात्र दूरदराज क्षेत्रों से विश्वविद्यालय के दूरवर्ती शिक्षा केंद्र के माध्यम से अपना कोर्स पूरा कर रहे हैं।
वे इस स्थिति में नहीं होते कि कांटेक्ट प्रोग्राम क्लासिज अटेंड करने के दौरान अपने रहने की व्यवस्था कर सकें। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय में उनके रहने के लिए हॉस्टल की व्यवस्था नहीं की गई है। प्रार्थी ने आग्रह किया है कि उसकी तरह दूरवर्ती शिक्षा केंद्र के अंतर्गत अपनी शिक्षा पूर्ण पूरी करने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था मुहैया करवाई जाए।
प्रार्थी ने पत्र में यह भी कहा है कि वर्ष 2000 में करीब ढाई करोड़ की राशि हॉस्टल को बनाने के लिए खर्च की गई। यह पैसा स्टूडेंट्स फंड से लेने के बाद इस भवन का निर्माण किया गया है, ताकि दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए ठहरने के लिए उचित व्यवस्था हो सके। फिर भी इस हॉस्टल में इनके रहने के लिए व्यवस्था नहीं की गई है। मामले पर सुनवाई 30 जून को होगी।