विश्वविद्यालयों को अब हर साल मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपना एक्शन प्लान देना होगा। इस एक्शन प्लान में गुणवत्ता में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शामिल होने की तैयारी, फैकल्टी, पाठ्यक्रम, कोर्स डिजाइन, रिसर्च, इनोवेशन व रोजगार के मौके बढ़ाने आदि पर विस्तार से जानकारी देनी होगी।
मंत्रालय एक्शन प्लान के तहत ही विश्वविद्यालयों को पैसा देगा और हर छह महीने बाद एक्शन प्लान की स्टेट्स रिपोर्ट भी देनी होगी। यदि विश्वविद्यालय अपने एक्शन प्लान के तहत काम नहीं करेंगे तो फंड रूक जाएगा। विवि इनोवेटिंग अकादमिक व ट्रेनिंग प्रोग्राम के माध्यम से फंड में बढ़ोतरी कर सकता है।
ईसी के पास पावर
विश्वविद्यालयों की ईसी (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) के पास पावर रहेगी। वे अपने फैसले लेने में सक्षम है, लेकिन यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत पॉलिसी में दखल देने का अधिकार नहीं होगा।