देश में पहली से आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को फेल नहीं करने की नीति जल्द बंद हो सकती है। केंद्र सरकार आरटीई एक्ट में संशोधन करने पर विचार कर रही है। हिमाचल सहित कई राज्य नो डिटेंशन पॉलिसी का पुरजोर विरोध भी कर चुके हैं। शिमला पहुंचे भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा साक्षरता विभाग के सचिव अनिल स्वरूप ने भी इस नीति के बंद होने का संकेत दिया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस बाबत काम कर रही है। जल्द फैसला लिया जाएगा। पहली से आठवीं कक्षा में विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा के आधार पर अगली कक्षा में भेजने और आठवीं कक्षा में एक बार फिर बोर्ड की परीक्षाएं शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए भारत सरकार आरटीई एक्ट 2009 में संशोधन करने जा रही है।
इस मुद्दे को लेकर नई दिल्ली में हुई कई बैठकों में हिमाचल सरकार अपना मत स्पष्ट कर चुकी है। सरकार ने केंद्र सरकार को आठवीं कक्षा तक फेल नहीं करने की प्रक्रिया को बंद करने की मांग की है। तर्क दिया गया है कि इस नीति के चलते नवीं और दसवीं कक्षा में अधिक बच्चे फेल हो रहे हैं।
आठवीं तक मूल्यांकन के हिसाब से ही बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेश देना पड़ रहा है। इस प्रक्रिया को बंद कर वार्षिक परीक्षाओं के आधार पर ही अगली कक्षा में बच्चों को प्रवेश देने की सरकार ने वकालत की है। सचिव अनिल स्वरूप ने भी शिमला दौरे के दौरान माना है कि इस नीति से विद्यार्थियों का भला नहीं हो रहा है।