गणित के विशेषज्ञ संजय सिंह का कहना है कि सीबीएसई ने शिक्षकों को ऐसी शिक्षण तकनीक पर काम करने को कहा है, जिसमें कमजोर और अच्छे, दोनों तरह के बच्चे एक साथ बराबर स्तर पर टॉपिक समझ सकें।
वहीं सीबीएसई ने शिक्षकों को कमजोर बच्चों पर ज्यादा ध्यान देने के लिए भी कहा है। बोर्ड का मानना है कि इससे बच्चों के परीक्षा परिणाम और बेहतर हो सकेंगे। वहीं शिक्षक भी पूरा ध्यान बच्चों पर देंगे।
बच्चों को जिम्मेदार बनाएगा कोर्स में बदलाव
सीबीएसई ने नौंवीं कक्षा के छात्रों को आर्टिरफिशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को छठे वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ने का विकल्प दिया है। बोर्ड का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का यह फैसला नई पीढ़ी को और अधिक संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
सीबीएसई ने योग को नए विषय के रूप में जोड़ा
सीबीएसई की ओर से इसके साथ ही प्रारंभिक शिक्षा में नए सत्र से खेलकूद के साथ योग को एक विषय के रूप में जोड़ा गया है। बोर्ड की ओर से नए पाठ्यक्रम में बच्चों के संपूर्ण विकास की बात की गई है।
अब बच्चों को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल शिक्षा में योग को नए विषय के रूप में पढ़ना होगा। सीबीएसई ने इंटरनल एसेसमेंट के अंक कम करके 15 कर दिए हैं और मुख्य परीक्षा में इसका वेटेज भी पांच अंकों का कर दिया गया है, यह पहले 15 अंकों का था।