प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की हाजिरी बायोमीट्रिक मशीनों से सुनिश्चित करवाने की मुहिम फिर शुरू हो गई है। टीचिंग ऑवर्स का मसला हल करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी यूजीसी नियमों पर मंथन करने में जुट गए हैं।
शिक्षकों के विरोध के चलते बीते दो साल से कॉलेजों में मशीनें लगाने की कवायद सिरे नहीं चढ़ पा रही है। ऐसे में अब शिक्षा विभाग ने सभी नियमों की जानकारी जुटाने के बाद मशीनें लगाने का फैसला लिया है।
प्रदेश के कॉलेजों में प्रोफेसरों, असिस्टेंट प्रोफेसरों सहित अन्य स्टाफ की हाजिरी बायोमीट्रिक मशीन से लगाने के प्रस्ताव पर बीते दो साल से काम चल रहा है। राजधानी शिमला के तीन कॉलेजों में पायलट आधार पर मशीनें लगाई गई थीं, लेकिन राजधानी के शिक्षकों ने सरकार की इस योजना का पालन नहीं किया।
एक सप्ताह में 26 घंटे के टीचिंग ऑवर्स पूरे करने का हवाला देते हुए शिक्षकों ने रोजाना सात से आठ घंटों की ड्यूटी करने का विरोध किया था। शिक्षकों के विरोध के चलते उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी इस मामले को लेकर सख्ती नहीं दिखाई। अब नए सिरे से शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव पर काम करना शुरू कर दिया है।
बीते दिनों शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के साथ हुई विभागीय अधिकारियों की बैठक में फैसला लिया गया कि यूजीसी के नियमों को स्टडी किया जाएगा। रोजाना कितने टीचिंग आवर्स होना अनिवार्य है। इसको लेकर रिपोर्ट बनाई जाए। प्रधान सचिव शिक्षा केके पंत को सरकार ने रिपोर्ट बनाने का जिम्मा सौंपा है। प्रधान सचिव की रिपोर्ट के बाद सरकार सख्ती से बायोमीट्रिक मशीनों का पालन करवाएगी।