लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव न करने और समाज को लड़कियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए नई कवायद शुरू की गई है। गुड़िया प्रकरण के बाद से लड़कियों में पैदा हुई असुरक्षा की भावना को दूर करने के लिए प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेजों में जेंडर चैंपियन बनाने का फैसला लिया गया है।
जेंडर इक्वेलिटी को प्रोमोट करने के लिए राज्य महिला आयोग के निर्देशानुसार उच्च शिक्षा निदेशालय ने इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी है। निदेशक डॉ. बीएल बिंटा ने प्रदेश के सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को आदेश जारी कर जल्द से जल्द जेंडर चैंपियन चुनने को कहा है।
जेंडर चैंपियन ये निश्चित करेंगे कि कॉलेज में किसी लड़की के साथ बुरा व्यवहार न हो। लड़कियों को आदर मिले। जेंडर चैंपियन बनाने का मकसद है कि युवा लड़के और लड़कियों को जेंडर सेंसेटिव बनाया जाए। ऐसे सकारात्मक समाज का विकास किया जाए, जहां पर लड़कियों को बराबर के अधिकार मिले।
जेंडर चैंपियन का काम शैक्षणिक संस्थानों में जेंडर अवेयरनेस पर डिबेट करवाना, एनुअल फंक्शन आयोजित करना, जेंडर इक्वेलिटी को प्रमोट करना और वर्कशॉप करवाना होगा। सभी को वुमेन हेल्पलाइन के बारे में जानकारी देनी होगी। जेंडर चैंपियन का बैज और सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
वो अपनी हर दिन की एक्टिविटी रिपोर्ट प्रिंसिपल को सौंपेगा। इसके तहत नोडल टीचर्स भी नियुक्त किए जाएंगे जो जेंडर चैंपियन को समय-समय पर गाइड करते रहेंगे।
जेंडर चैंपियन बनने के लिए स्टूडेंट को परीक्षा में 50 फीसदी अंक लाना जरूरी है। स्टूडेंट कॉलेज में नियमित हाजिर होने वाला हो। उसमें लीडरशिप क्वालिटी होनी चाहिए। जेंडर चैंपियन बनने के लिए स्टूडेंट्स प्रिंसिपल को अपना नाम दे सकते हैं।