प्रदेश में स्थित निजी बीएड कॉलेज अब बिना काउंसलिंग के कालेजों में खाली पड़ी सीटों को भर सकेंगे। हिमाचल सरकार ने खाली सीटें भरने के लिए लगाई गई काउंसलिंग की शर्त को हटा दिया है। प्रदेश के निजी बीएड कॉलेजों में एक हजार से अधिक सीटें रिक्त चल रही हैं।
निजी बीएड कॉलेज एसोसिएशन ने सरकार ने काउंसलिंग की शर्त में छूट देने की मांग की थी। इसी कड़ी में शुक्रवार को शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री की मंजूरी लेने के बाद काउंसलिंग में छूट देने की अधिसूचना जारी की। अब कॉलेज अपने स्तर पर इन खाली सीटों को भर सकेंगे।
हिमाचल प्रदेश निजी बीएड कॉलेज एसोसिएशन ने सरकार से खाली सीटों को भरने के लिए काउंसलिंग की छूट मांगी थी। शिक्षा विभाग ने इस संदर्भ में प्रदेश विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा था। पूछा गया था कि क्या नियमों के तहत बिना काउंसलिंग के सीटों को भरने की छूट दी जा सकती है या नहीं।
विश्वविद्यालय द्वारा इस बाबत हरी झंडी देने पर सरकार ने छूट देने का फैसला लिया है। निजी बीएड कॉलेज प्रबंधकों का कहना है कि देश के अन्य राज्यों में कोई प्रवेश परीक्षा नहीं करवाई जाती। सिर्फ हिमाचल में ही विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा लेता है। खाली सीटों को भरने के लिए तर्क दिया गया कि नियमों में भी इस का प्रावधान है। कहा गया कि जब प्रावधान है तो काउंसलिंग क्यों करवाई जाती है।
प्रवेश परीक्षा के बाद मेरिट आधार पर कॉलेजों को स्वयं ही सीटें भरने की अनुमति दी जानी चाहिए। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र धर्मशाला के अलावा प्रदेश के 68 प्राइवेट कॉलेजों में बीएड की डिग्री करवाई जाती है।
हिमाचल में बीएड की कुल 7200 सीटें है। इनमें मेडिकल की 1781, नॉन मेडिकल की 1874, आर्टस और कार्मस की 3545 सीटें शामिल है। विश्वविद्यालय ने सीटों को भरने के लिए प्रवेश परीक्षा ली थी। इसके बाद काउंसलिंग हुई। काउंसलिंग के बाद करीब एक हजार सीटें निजी बीएड कॉलेजों में खाली रह गई हैं।