हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सोमवार से बीएड काउंसलिंग का दौर शुरू हो गया। पहले दिन बीएड प्रवेश परीक्षा में 73 और इससे अधिक अंक वाले विद्यार्थियों के लिए विज्ञान संकाय के मेडिकल बीएड कोर्स के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके लिए करीब 535 पात्र छात्र-छात्राओं को बुलाया गया था। वहीं, पहले दिन ही यूजी के सीबीसीएस रूसा के तहत पहले बैच के पासआउट छात्रों में कुछ के परीक्षा परिणाम घोषित न होने पर काउंसलिंग में अपीयर होने में मुश्किल पेश आई। सभागार में सुबह तय समय पर बीएड काउंसलिंग कमेटी के चेयरमैन प्रो.एसएस चौहान और कमेटी की समन्वयक व एचपीयू विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शना राणा की देखरेख में देर शाम तक काउंसलिंग जारी रही।
पहले दिन एचपीयू के अपने बीएड विभाग, गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एजूकेशन धर्मशाला सहित प्रदेश भर के करीब निजी 74 बीएड कॉलेजों की मेडिकल सीटों के लिए यह काउंसलिंग हुई। मेरिट आधार पर छात्रों की शैक्षणिक योग्यता, श्रेणी सहित अन्य प्रमाण पत्र और दस्तावेजों को जांचा गया। इसके बाद ही मेरिटवाइज छात्रों को कॉलेजों में प्रवेश दिया गया। छात्रों ने उसी के मुताबिक तय फीस आदि जमा करवाने की प्रक्रिया को पूरा किया।
अब 63 और इससे अधिक अंक वाले छात्रों की होगी काउंसलिंग
मंगलवार को तय शेडयूल के मुताबिक बीएड (मेडिकल) डिग्री कोर्स के लिए 63 या इससे अधिक प्राप्तांक वाले छात्र छात्राओं के लिए काउंसलिंग होगी।
आधे अधूरे परीक्षा परिणाम वाले छात्रों को पेश आई परेशानी
रूसा सीबीसीएस के पहले पासआउट हुए यूजी डिग्री के बैच के बीएड प्रवेश परीक्षा पास व मेरिट में होने के बावजूद यूजी के लटके परीक्षा परिणाम के कारण परेशान होना पड़ रहा है। बीएड काउंसलिंग के पहले ही दिन दर्जनों ऐसे छात्र परेशान हुए। इनमें कुछ का परिणाम पूरा घोषित ही नहीं हुआ था, कुछ का डिग्री ग्रेड कार्ड नहीं मिला था।
इन छात्रों में कुछ ऐसे भी थे, जो छह के छह यूजी कोर्स के सेमेस्टर के परिणाम लेकर आए थे, उन्हें काउंसलिंग कमेटी ने मानकर काउंसलिंग कर सीटें आवंटित कर दीं, मगर जिन छात्रों को पूरे सेमेस्टर का परिणाम ही नहीं आया है, उनकी मुश्किल बरकरार है। सोमवार को भी काउंसलिंग में शामिल होने आए बहुत से छात्र परीक्षा नियंत्रक कार्यालय और संबंधित शाखाओं में लटके परिणाम के मामले सेटल करने को भटकते नजर आए।