आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों ने हरियाणा की तर्ज पर वेतन देने की मांग की है। मंगलवार को सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी यूनियन ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक से मुलाकात की। यूनियन ने दस सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए प्री नर्सरी कक्षाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों में चलाने की पैरवी की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन की राज्य अध्यक्ष नीलम जसवाल, महासचिव राज कुमारी, उपाध्यक्ष खीमी भंडारी की अगुवाई में मिले प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक से बढ़े हुए 1500 व 750 रुपये की बकाया राशि का तुरंत भुगतान करने की मांग की।
यूनियन ने हरियाणा की तर्ज पर साढ़े ग्यारह हजार और छह हजार वेतन देने, कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, केंद्र सरकार के निर्देशानुसार सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने, पेंशन व ग्रेच्युटी सुविधा लागू करने, एनएचआरएम की बकाया राशि का भुगतान करने, आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री नर्सरी का दर्जा देने, मिनी आंगनबाड़ी को पूर्ण आंगनबाड़ी केंद्र का दर्जा देने, सभी प्रकार के रजिस्टर विभाग द्वारा देना, पोषाहार सामग्री विभाग द्वारा समय पर देना, राज्य, जिला व ब्लॉक स्तर पर शिकायत निवारण कमेटियां गठित करने की मांग की।
यूनियन की राज्य अध्यक्ष नीलम जसवाल ने केंद्र की मोदी सरकार पर आईसीडीएस परियोजना को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान केंद्र सरकार ने आईसीडीएस के बजट में लगभग आधी कटौती कर दी है। केंद्र सरकार इस परियोजना का निजीकरण कर रही है। उन्होंने कहा है कि केंद्र और प्रदेश सरकारें लगातार आंगनबाड़ी विरोधी नीतियां अपना रही हैं। प्री नर्सरी को प्राथमिक स्कूलों में चलाने की अधिसूचना जारी करके आंगनबाड़ी कर्मियों के रोजगार पर हमला किया है। इसके खिलाफ आंगनबाड़ी कर्मी आंदोलन तेज करेंगे।