ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन ने हिमाचल के एक दर्जन से ज्यादा तकनीकी कॉलेजों की 972 सीटों पर कैंची चला दी है। टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टाफ, लैबोरेटरी और अन्य आधारभूत सुविधाओं की कमी के चलते एआईसीटीई ने कार्रवाई की है। बीटेक की 900, एमटेक की 42 और बी-फार्मेसी की 30 सीटें कम कर दी हैं।
प्रदेश के जिन कॉलेजों की सीटें कम हुई हैं, उनमें 10 बीटेक, 4 एमटेक और एक फार्मेसी कॉलेज शामिल है। ये कॉलेज इस शैक्षणिक सत्र में उपरोक्त सीटों के लिए नए दाखिले नहीं कर सकेंगे। बीते वर्ष एआईसीटीई ने प्रदेश के डेढ़ दर्जन कॉलेजों में 2720 सीटें कम कर दी थीं। सीटों में कटौती करने से निजी संस्थानों में हड़कंप मच गया है।
सूबे में संचालित सभी तकनीकी कॉलेजों को हर साल तकनीकी विवि से प्रोविजनल संबद्धता लेनी पड़ती है। संबद्धता प्रदान करने से पहले तकनीकी विवि की कमेटियां संबंधित संस्थानों में आधारभूत ढांचा, फैकल्टी समेत अन्य सुविधाओं का निरीक्षण करती हैं। कमेटियों की रिपोर्ट के बाद बोर्ड ऑफ एफिलिएशन की बैठक में इस पर निर्णय लिए जाते हैं।
किसकी कितनी सीटें कम
प्रदेश में चल रहे 43 संस्थान- हिमाचल में 17 इंजीनियरिंग, 15 बी-फार्मेसी, 8 एमबीए और 3 एमसीए कॉलेज हैं।
प्रदेश में चल रहे इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियरिंग, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और आटोमोबाइल में इंजीनियरिंग होती है।
किसकी कितनी सीटें कम
बीटेक 900
एमटेक 42
फार्मेसी 30
हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के वीसी प्रो. आरएल शर्मा ने बताया कि एआईसीटीई के निर्धारित मापदंड पूरा नहीं करने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई की है।
इस बार सूबे के एक दर्जन से अधिक कॉलेजों में करीब एक हजार सीटें कम हो गई हैं। महाविद्यालयों को कमियों को पूरा करने का समय दिया गया, लेकिन नोटिस के बावजूद कमियां दूर न करने पर कार्रवाई अमल में लाई गई।