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ट्रिब्यूनल बंद करने के विरोध में अधिवक्ताओं ने शिमला में किया प्रदर्शन

Thu, 18 Jul 2019 09:08 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के प्रस्तावित निर्णय के खिलाफ  वकीलों ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया। ट्रिब्यूनल परिसर के बाहर हुए इस प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। वकीलों ने इस बाबत 31 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

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कमेटी ने इस फैसले के खिलाफ  उग्र प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट और जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता भी इसमें पूरा सहयोग दे रहे हैं। ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन का कहना है कि राज्य सरकार का यह फैसला गलत है।

इससे वकीलों और कर्मचारियों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। अधिवक्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने जुलाई 2008 में इसे बंद करने के बाद फरवरी 2015 में दोबारा खोला था और अब इसे बंद करने के लिए कैबिनेट ने निर्णय ले लिया।
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राज्य सरकार का फैसला पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और एकतरफा है। ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश चंदेल ने कहा कि एक सरकार ट्रिब्यूनल को बंद करती है और दूसरी खोलती है। फिर वही सरकार इसे बंद कर देती है।

सरकार को इसे मजबूत करना चाहिए न कि बंद। भारत में कानून के राज को सर्वोपरि माना गया है जबकि राज्य सरकार को यह बात रास नहीं आ रही। ट्रिब्यूनल की ओर से ट्रांसफर के मामलों में पारित स्थगन आदेशों की एवज में ट्रिब्यूनल को बंद करना पूरी तरह से राज्य के तानाशाही रवैये को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार प्रदेश ट्रिब्यूनल की तर्ज पर हरियाणा में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खोलने का निर्णय ले रही है। हमारी सरकार को ट्रिब्यूनल रास नहीं आ रही। 

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