हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के पीजी कोर्स की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर अब सामान्य वर्ग के छात्रों का दाखिला हो सकेगा। यह वह सीटें होंगी, जो खाली रह जाती हैं। एचपीयू नए शैक्षणिक सत्र से यह व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसे बाकायदा पीजी कोर्स के प्रोस्पेक्टस में भी लिखा जाएगा।
विश्वविद्यालय यह व्यवस्था हाईकोर्ट के आदेशों पर करेगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षिण सीटें यदि खाली रह जाती हैं तो उन्हें भरने के लिए सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों का दाखिल किया जाए।
बीते दिनों विश्वविद्यालय में हुई डीन कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया है। इस फैसले के लागू होने से किसी भी विभाग में इन दोनों आरक्षित वर्ग की सीटें खाली नहीं रहेंगी। सामान्य वर्ग में प्रवेश की पात्रता को पूरा करने वाले उम्मीदवारों को आरक्षित सीटों के लिए प्रवेश मिल सकेगा।
विश्वविद्यालय अब तक पीजी और अन्य एमफिल व पीएचडी कोर्स में प्रदेश सरकार की ओर से तय आरक्षण रोस्टर को ही लागू करता है। विश्वविद्यालय में वर्तमान में आठ संकाय में 28 पीजी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स चलाए जा रहे हैं।
इनमें जहां मेरिट के आधार पर प्रवेश होता है, वहां रोस्टर लागू किया जाता है। सेल्फ फाइनांसिंग कोर्स में भी सब्सिडाइज्ड और नान सब्सिडाइज्ड श्रेणी है, मगर कई कोर्स में आरक्षण रोस्टर लागू नहीं होता है।
दिव्यांग को पीजी कोर्स में आरक्षित होंगी पांच फीसदी सीटें
डीन कमेटी ने न्यायालय आदेश के तहत पीजी कोर्स, एमफिल व पीएचडी कोर्स के प्रवेश में दिव्यांग छात्रों की सीटों का आरक्षण कोटा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच फीसदी करने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इसे भी एचपीयू जून में शुरू होने वाले नए सत्र में लागू करेगा।
न्यायालय के दोनों फैसले नए सत्र से होंगे लागू
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने कहा कि कोर्ट आदेशों को एचपीयू नए सत्र से लागू करने जा रहा है। आरक्षित एससी और एसटी वर्ग की सीटों को पात्र उम्मीदवार न मिलने पर सामान्य वर्ग के छात्रों को अवसर दिया जाएगा। दिव्यांगों के लिए आरक्षित सीटों का प्रतिशत तीन से पांच कर लागू किया जा रहा है। इसे पीजी के प्रोस्पेक्टस में शामिल किया जाएगा।