फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्स्ट सेमेस्टर में 90 फीसदी से ज्यादा स्टूडेंट्स फेल, एचपीयू पर उठे सवाल

Tue, 30 Aug 2016 09:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
एचपीयू शिमला
विज्ञापन
एचपीयू के कारनामे ने एक बार फिर विद्यार्थियों को मुसीबत में डाल दिया है। कई माह की देरी के बाद शनिवार को घोषित रूसा पहले सेमेस्टर के परिणाम में अधिकतर छात्र फेल हैं। छात्र संगठनों का दावा है कि फर्स्ट सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम में 90 फीसदी से अधिक विद्यार्थी फेल हैं।
विज्ञापन


वेबसाइट से डाउनलोड रिजल्ट कार्ड में इंटरनल असेसमेंट और थ्योरी परीक्षा अंक के आगे स्टार लगे हैं। इससे परीक्षा में अपीयर करीब 40 हजार छात्र-छात्राएं परेशान हैं। परिणाम आधिकारिक तौर पर 32 हजार छात्रों का ही घोषित हुआ है। जिनका हुआ है, उनमें अधिकतर फेल हैं। छात्र कारणों का पता लगाने को विवि पहुंचने शुरू हो गए हैं।

एक साथ इतनी तादाद में छात्रों के फेल होने के लिए तकनीकी खामी को कारण माना जा रहा है। वहीं, इसके कारणों का पता लगाने को परीक्षा नियंत्रक की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच शुरू कर दी है। संजौली कॉलेज में भी अधिकतर छात्र रूसा गाइडेंस ब्यूरो में परिणाम घोषित न होने और परिणाम में स्टार लगा होने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। एचपीयू में भी सोमवार से भीड़ जुटनी शुरू हो गई।
विज्ञापन


अक्तूबर में अंक विभाजन अनुपात बदलाव के बाद हुई थी पहली परीक्षा  
अक्तूबर और नवंबर 2015 में यूजी कोर्स में इंटरनल असेसमेंट, थ्योरी परीक्षा के अंक विभाजन के अनुपात को 50:50 से बदलकर थ्योरी में 70 और इंटरनल असेसमेंट में 30 किया गया। इसके बाद यह पहली परीक्षा हुई थी। नई प्रणाली में छात्र को थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट दोनों में 45-45 फीसदी अंक लेना जरूरी था। पहले दोनों का 45 फीसदी काफी होता था।

एक कॉलेज के छात्रों के रिकॉर्ड में कोई भी छात्र एक विषय में इंटरनल असेसमेंट और थ्योरी परीक्षा में 45 फीसदी अंक नहीं ले पाए हैं। कमेटी बनाकर कॉलेज शिक्षक , कंप्यूटर विशेषज्ञ को साथ लेकर वे स्वयं छानबीन कर रहे हैं। यदि तकनीकी खामी है तो इसे दुरुस्त किया जाएगा। यदि छात्र उत्तीर्ण नहीं हुए होंगे तो उन्हें रूटीन में ही सेमेस्टर पास करने को परीक्षाएं देनी होंगी। इसके लिए मौका दिया जाएगा। -डॉ. जेएस नेगी, परीक्षा नियंत्रक

प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राचार्य संघ के अध्यक्ष आरके कायस्थ का मानना है कि खराब रहे प्रथम सेमेस्टर के परिणाम का कारण, अंक विभाजन में लाया बदलाव भी हो सकता है। इसमें रिजल्ट तैयार करने को बनाया फार्मूला भी कारण हो सकता है। विवि इसका पता लगाकर परिणाम ठीक करवाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें