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विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव: सीएम सुक्खू बोले- हर पीएचसी में एंटी वेनम इंजेक्शन रखेंगे

Wed, 28 Aug 2024 06:24 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

सुक्खू ने कहा कि दस साल पहले आईसीएमआर ने इस संबंध में अध्ययन किया था। खड्डों के साथ बरसात में सांप होते हैं। सांप बरसात में ही सबसे ज्यादा डसते हैं। 
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सदन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू । - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सर्पदंश के मामलों का समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए हर पीएचसी में एंटी वेनम इंजेक्शन रखे जाएंगे। 108 एंबुलेंस में भी यह उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट नहीं होने की स्थिति में संबंधित पंचायत प्रधान और स्थानीय प्रशासन की ओर से वेरिफाई करने पर मुआवजा दिलाए जाने की व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाएगा। शाहपुर के कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया ने बुधवार को विधानसभा सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया। उन्होंने शाहपुर में चिकित्सकों की कमी का मामला भी उठाया। इसी पर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब दिया।

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सुक्खू ने कहा कि दस साल पहले आईसीएमआर ने इस संबंध में अध्ययन किया था। खड्डों के साथ बरसात में सांप होते हैं। सांप बरसात में ही सबसे ज्यादा डसते हैं। पीएचसी स्तर पर इंजेक्शन रखा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने भी कहा कि केवल सिंह पठानिया ने यह विषय उठाया है। शांडिल ने कहा कि हर पीएचसी में एंटी वेनम उपलब्ध होना चाहिए। इसे सुनिश्चित किया जाएगा। 200 डॉक्टरों की भर्ती का मामला लोक सेवा आयोग को भेजा जा चुका है।

जब सेना में था तो कोबरा सारी रात मेरे पास सोया : शांडिल
कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि 1965 के ऑपरेशन के दौरान कोबरा मेरे पास सारी रात सोया। उसने नुकसान नहीं किया। उसने नहीं काटा तो उसे नहीं मारा। उसे भगवान शिव की कृपा माना गया।

बजट सत्र में भी खड़पे का अटैक हुआ था, कोबरे का नहीं : पठानिया
विधायक केवल सिंह पठानिया ने चुटकी ली कि बजट सत्र में खड़पे सांप का अटैक हुआ था, वह कोबरे का नहीं था। अगर कोबरा डस जाए तो जान नहीं बचती है। खड़पे का डसा हुआ बच जाता है। मणिमहेश में भगवान शिव का आशीर्वाद हुआ। सांप, सपेरे, खड़पे और डीने का रोल हर संस्कृति में होता है। इस पर सदन में ठहाके लगे तो उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी पूछा - ये खड़पा कौन था? इस पर भी ठहाके लगे।

सूखे पेड़ों पर पहला अधिकार पंचायत का, उसके बाद वन निगम का : सुक्खू
 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने जंगलों में सूखे पेड़ों को हटाने की अनुमति देने की शक्ति वन मंडलाधिकारियों यानी डीएफओ को दी है। इस लकड़ी पर पहला अधिकार स्थानीय पंचायत का होगा। उसके बाद वन निगम निकालेगा। सुक्खू ने यह बात सदन में भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए दी। शौरी ने कहा कि 400 से ज्यादा हरे पेड़ काटे गए हैं। 16 अगस्त को यह मामला ध्यान में आया तो वह ग्रामीणों के साथ मौके पर गए। विभाग ने 10 पेड़ों की एफआईआर की है। कांग्रेस का नेता कुल्लू से ठेकेदार है, वही इसमें शामिल है। सुरेंद्र शौरी ने कहा कि वह गांव के अंदर देख रहे हैं कि साल्वेज के नाम पर कुल्लू में 25 टेंडर लगे हैं। सूखे पेड़ों के नाम पर हरे पेड़ काटे जा रहे हैं। मनरेगा के कामगारों की तीन बार जियो टैगिंग हो रही है। पेड़ों की नहीं हो रही है। हर पेड़ की जियो टैगिंग होनी चाहिए।
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इस पर सुक्खू ने कहा कि 2022 में 836 सूखे पेड़ों के लिए 2023-25 के बीच गणना की गई। कटाई और परिवहन का काम वन निगम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मदन सूद को काम दिया गया। विधानसभा सदस्य ने प्रेस वार्ता की तो एक टीम मौके पर गई। वहां राई, तोष, हरसू आदि के पेड़ थे। टीम ने विधायक के दावे से अलग 16 पेड़ों को काटने की बात निकली। एफआईआर दर्ज की गई है। इस पर ठेकेदार के खिलाफ 99 लाख का जुर्माना लगाया गया है। वह मामले की गंभीरता समझते हैं। 400 पेड़ काटने की कोई वीडियोग्राफी नहीं है। अगर ऐसी कोई वीडियोग्राफी है तो उन्हें दी जाए। इसकी जांच चल रही है। 358 पेड़ नियमानुसार काटे गए हैं। 16 अवैध कटे हैं।
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