सिरमौर जिला में स्थानीय नेता ही नहीं बल्कि बाहरी नेताओं को भी जनता ने सिर-आंखों पर बैठाया है। बात चाहे विधानसभा क्षेत्र बदलने की हो या फिर दूसरे जिले से आकर चुनाव लड़ने की। कई नेता अपना चुनाव क्षेत्र बदलकर यहां जीतने में कामयाब हुए हैं। हिमाचल निर्माता एवं प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार ने भी अपना हलका बदला था। गृह क्षेत्र पच्छाद आरक्षित होने पर डॉ. परमार रेणुका विधानसभा क्षेत्र से 1967 से 1977 तक विधायक रहे।
वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने तो सोलन जिला से आकर नाहन में दो बार विधानसभा चुनाव जीता है। यही नहीं, पच्छाद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी पच्छाद से बाहर के लोग कर चुके हैं। 13 विधानसभा चुनावों में से तीन चुनावों में पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र में बाहरी नेता विजयी हुए हैं।
वर्ष 1967 से 1982 तक यहां जिला के अन्य विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं को जीता कर पच्छाद की जनता ने विधायक बनाया है। पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र में जालम सिंह वर्ष 1967 से 1977 तक विधायक रहे।
वह पच्छाद के नहीं बल्कि शिलाई विधानसभा क्षेत्र के निवासी थे। उन्होंने लगातार दो बार पच्छाद का प्रतिनिधित्व किया। 1977 में कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारा था, जिसमें वह जनता पार्टी के बालकराम से चुनाव हार गए थे। उन्हें हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार राजनीति में लाए थे। 1977 में भी जनता पार्टी ने नाहन निवासी श्रीराम जख्मी को टिकट दिया। उन्होंने यहां के स्थायी निवासी उम्मीदवारों को हराकर विजय हासिल की थी। वह वर्ष 1982 तक पच्छाद के विधायक रहे।