व्यापार मंडल का दावा है कि कोर्ट से इस बारे में कारोबारियों को राहत मिल चुकी है। नॉन पीएफए लाइसेंस रिन्यू करवाना जरूरी नहीं है। शिमला व्यापार मंडल अध्यक्ष संजीव ठाकुर ने कहा कि इस बारे में निगम आयुक्त से बात की जाएगी। किसी भी शहर में लाइसेंस रिन्यू नहीं हो रहे हैं। शिमला में भी यही व्यवस्था रहनी चाहिए।
नगर निगम ने शुरू किया निरीक्षण
नगर निगम की संपदा शाखा ने शहर में दुकानदारों के लाइसेंस चेक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संजौली क्षेत्र में सोमवार को दुकानदारों के लाइसेंस चेक किए गए। इस दौरान जिन दुकानदारों के पास लाइसेंस नहीं मिले, उन्हें दो हफ्ते के भीतर लाइसेंस बनाने को कहा है। नियमानुसार नगर निगम परिधि में दुकान चलाने से पहले निगम से लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है। बिना लाइसेंस कारोबार नहीं कर सकते। ऐसा करने पर जुर्माने का प्रावधान है। निगम प्रशासन के अनुसार हर पांच साल बाद यह लाइसेंस रिन्यू किया जाता है। इसका शुल्क 500 रुपये रखा है। संपदा शाखा अधीक्षक अमर चंद ने बताया कि सभी कारोबारियों को दो हफ्ते के भीतर लाइसेंस रिन्यू करवाने को कहा गया है।
नए कारोबारियों के लिए अनिवार्य
शहर में नए कारोबारियों को लाइसेंस बनाना अनिवार्य है। इन्हें निगम के पास आवेदन करना होगा। आवेदन में दुकान के आकार के साथ कारोबार की जानकारी देनी होगी। इसके बाद शुल्क जमा करने पर नगर निगम इन्हें लाइसेंस जारी करेगा।
आखिर कितने लाइसेंस बनाएं : महासचिव
हरजीत मंगा की अगुवाई वाले शिमला व्यापार मंडल के महासचिव नितिन सोहल ने कहा कि कारोबारियों के लिए कई तरह के लाइसेंस बनाने पड़ रहे हैं। इनसे राहत मिलनी चाहिए। निगम से लाइसेंस रिन्यू करने के मामले पर जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री के समक्ष मामला उठाया जाएगा। कारोबारियों को इससे राहत मिलनी चाहिए।