नगर निगम की वित्त संविदा एवं योजना समिति ने उप नियमों को दी मंजूरी, सदन लेगा अंतिम फैसला
159 श्रेणियों के तहत कारोबार करने वालों को लेना होगा लाइसेंस
पांच साल रहेगी लाइसेंस की अवधि, कारोबार, दुकान के आकार, एरिया के हिसाब से तय होगी फीस
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कारोबार करने वाले हर कारोबारी को अब नगर निगम से भी ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में सोमवार को टाउनहॉल में हुई वित्त संविदा एवं योजना समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
इसके लिए बनाए गए उप नियमों को भी समिति ने मंजूरी दे दी है। अब इस माह के अंत में होने वाली मासिक बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगेगी। इसमें लाइसेंस की फीस, इसकी अवधि और जुर्माना राशि पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। शहर में चार हजार से ज्यादा दुकानदारों, सैकड़ों होटल मालिकों समेत हजारों कारोबारियों पर यह फैसला लागू होगा। नगर निगम के अनुसार शहरी विकास विभाग से भी इस बारे में दिशा-निर्देश जारी हुए हैं। इसके लिए उपयोग नाम से साॅफ्टवेयर भी तैयार किया है। खाने-पीने की चीजों का कारोबार करने वाले कारोबारियों को भी फूड लाइसेंस के अलावा नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। तहबाजारी भी इसके दायरे में आएंगे।
नगर निगम पहले से कारोबारियों को ऑनलाइन लाइसेंस जारी करने की सुविधा दे रहा है। लेकिन सिर्फ 927 कारोबारियों ने ही अभी तक लाइसेंस लिए हैं। अब सभी के लिए इसे अनिवार्य किया जा रहा है। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सदन में अंतिम चर्चा की जाएगी। बैठक में उप महापौर उमा कौशल, आयुक्त भूपेंद्र अत्री, पार्षद उर्मिला कश्यप, शीनम कटारिया, बिट्टू कुमार, वीरेंद्र ठाकुर भी मौजूद रहे।
आकार, गतिविधि और एरिया
के हिसाब से तय होगी फीस
नगर निगम के अनुसार किस कारोबार से कितनी लाइसेंस फीस ली जानी है, इसके लिए तीन फैक्टर तय किए गए हैं। कितने आकार के दुकान या भवन में कारोबार चल रहा है, कारोबारी कौन सी व्यापारिक गतिविधि कर रहा है, इसके हिसाब से फीस तय होगी। एरिया के हिसाब से भी फीस तय होगी। कोर एरिया की फीस मर्ज एरिया से ज्यादा होगी। आकार के हिसाब से अभी 125 वर्ग फुट तक 400 रुपये, इससे ज्यादा के क्षेत्रफल पर 600 रुपये फीस तय की है। वहीं, हॉट, लॉन्जिंग हाउस, गेस्ट हाउस, गैस कंपनी, कोल कंपनी, प्रशिक्षण केंद्र, सिनेमा, पेट्रोल पंप, ट्रेवल एजेंसी, लैब, क्लीनिक आदि की 1000 रुपये फीस रखी है। अस्थाई रूप से लगने वाली दुकानों का शुल्क भी कारोबार के हिसाब से तय किया गया है। यह 50 रुपये से 200 रुपये प्रति दिन है। निगम के अनुसार पहले एक ही श्रेणी के तहत लाइसेंस जारी होते थे। अब कारोबार की 159 श्रेणियां तय की हैं। कारोबारी अपनी श्रेणी के अनुसार लाइसेंस के लिए आवेदन करेंगे।
ये हो सकते हैं लाइसेंस के नियम
नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस लेने के नियम भी तय होंगे। 18 साल से नीचे के युवा को लाइसेंस नहीं मिलेगा। समय पर लाइसेंस रिन्यू न करवाने या देरी करने पर एक से दस हजार तक जुर्माना हो सकता है। सदन की मंजूरी के बाद इसे सरकार को भेजा जाएगा।
डिप्टी मेयर को भी वाहन सुविधा
वित्त संविदा समिति की बैठक के दौरान महापौर ने अधिकारियों को उप महापौर के लिए भी सरकारी वाहन सुविधा देने का प्रस्ताव सदन में लाने के निर्देश दिए। कई साल पहले भी यह प्रस्ताव पारित हो चुका है लेकिन आज तक उप महापौर को निगम ने वाहन सुविधा नहीं दी है।