यही नहीं, पर्व में अहम भूमिका निभाने वाले तीन स्थानीय लोगों की अकस्मात मौत तक हो गई। कस्बे में एक भी सुनार की दुकान नहीं है। दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित पपरोला बाजार पूरे प्रदेश में सोने की खरीददारी के लिए प्रसिद्ध है।
लेकिन बैजनाथ में सोने का व्यापार नहीं होता। मंदिर पुजारी राम शर्मा ने बताया कि रावण ने यहां पर तपस्या की थी। सोने की लंका के काले पड़ जाने के कारण यहां पर आज तक एक भी सोने की दुकान स्थापित नहीं हो पाई है। कुछ लोगों ने प्रयास जरूर किए जो विफल रहे।