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अफसर लापरवाह, फाइलों में सिमट गई सीएम वीरभद्र की कई बड़ी घोषणाएं

Thu, 11 May 2017 12:09 PM IST
अनिमेष कौशल/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लेकर अफसरशाही गंभीर नहीं है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाओं के दौरान की जाने वाली कई घोषणाएं सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह गईं हैं। साल 2016 में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जिला शिमला में दस प्राइमरी स्कूलों को अपग्रेड कर मिडल स्कूल बनाने की घोषणा की थी।
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लेकिन, एक साल बाद भी इन घोषणाओं को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग स्कूलों का सर्वे तक नहीं करवा सका है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में दस नए प्राइमरी स्कूल खोलने पर भी शिक्षा विभाग अभी तक फैसला नहीं ले सका है।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में बीते दिनों हुई जिला उपनिदेशकों की बैठक में इसका खुलासा हुआ है। निदेशक मनमोहन शर्मा ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उपनिदेशकों को जल्द से जल्द सर्वे रिपोर्ट भेजने को कहा है।
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ये स्कूल नहीं हो सके अपग्रेड
14 जून 2016 को मुख्यमंत्री ने जिला शिमला के तारासनू, मंडल, नेरी, जुबली, रुपड़, संगरोली, रोहाना, भाटगढ़ और समूही प्राइमरी स्कूल को मिडल स्कूल के तौर पर अपग्रेड करने की घोषणा की थी। 28 जून को मुख्यमंत्री ने टुटू प्राइमरी स्कूल को अपग्रेड करने की घोषणा की थी। लेकिन घोषणा के एक साल बाद भी शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को अपग्रेड नहीं किया है। निदेशालय के पास जिला शिमला के उपनिदेशक कार्यालय से अभी तक इस संदर्भ में सर्वे रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।

यहां खुलने थे नए प्राइमरी स्कूल
19 अप्रैल 2016 को मुख्यमंत्री ने बिलासपुर जिला के काशी, 27 मई को सोलन के मझयार, 14 जून को शिमला के शिरगढ़, 17 जून को सिरमौर के खटना, पटना, मनोली केदारी, 12 सितंबर 2016 को कुल्लू के मशयार, 18 दिसंबर को कांगड़ा के जसेहर, पांच फरवरी 2017 को कुट, नाग धरमन और मंडी के मनाह में नए प्राइमरी स्कूल खोलने की घोषणा की थी लेकिन शिक्षा विभाग अभी तक इस पर फैसला नहीं ले सका है।
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यहां तो साल बाद भी पूरा नहीं हुआ मंत्रिमंडल का फैसला

प्रवीण कुमार/हमीरपुर- मंत्रिमंडल के फैसले और अधिसूचनाएं एक साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। फाइलों में बंद सरकार के फैसले विभिन्न विभागों की अलमारियों में धूल फांक रहे हैं। रेडक्रॉस समेत प्रदेश की विभिन्न सोसायटियों के तहत कार्यरत कर्मचारियों के लिए प्रदेश सरकार ने 27 मार्च 2016 को मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम निर्णय लिए थे।

मंत्रिमंडल ने रेडक्रॉस सोसायटी, एड्स कंट्रोल सोसायटी, क्षय रोग नियंत्रण सोसायटी और रोगी कल्याण समिति के तहत 10 वर्ष तक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को नियमित करने, 3 वर्ष तक सेवाएं देने वालों के लिए 5 वर्ष का अनुबंध, 5 वर्ष तक सेवाएं देने वालों के लिए 8 वर्ष का अनुबंध और 8 वर्ष तक सोसायटियों के तहत सेवाएं देने वालों के लिए फुल टाइम स्केल और ग्रेड पे देने समेत अन्य निर्णय लिए थे। मंत्रिमंडल के इन निर्णयों के बाद अप्रैल 2016 में सरकार ने अधिसूचना भी जारी की लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह निर्णय अभी तक लागू नहीं हो पाए हैं।

वर्तमान में प्रदेश स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों में करीब दो हजार कर्मचारी रेडक्रॉस सोसायटी और अन्य सोसायटियों के तहत सेवाएं दे रहे हैं। कुछ कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग में लेबोरेटरी असिस्टेंट का काम कर रहे हैं। लेेकिन अभी तक महज नाममात्र का वेतन ही दिया जा रहा है।

सीएस बोले - शीघ्र मिलेगा लाभ
मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि मंत्रिमंडल के निर्णय की अधिसूचना जारी करने के बाद कुछ कर्मचारियों को इसका लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा कि विभागीय प्रक्रिया के चलते निर्णय को लागू करने में कुछ समय लगता है। मुख्य सचिव ने कहा कि शेष कर्मचारियों को भी शीघ्र लाभ मिलेगा।
 
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