विधायक राकेश सिंघा ने बताया कि सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई न करने के चलते रोष है। डीवाईएफआई के जिला सह सचिव अशोक ठाकुर ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद पुलिस अचानक शव ले जा रही थी। परिजनों के दबाव के बाद शव सौंपा गया।
मंत्री से बसपा नेता की पत्नी को नौकरी, बच्चों की मुफ्त शिक्षा, परिवार को बीस लाख रुपये देने के अलावा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। जिला सह सचिव अशोक ठाकुर ने बताया कि मंत्री ने उनकी मांगें मान ली हैं।
बसपा नेता के परिजनों, माकपा विधायक, शिक्षा मंत्री और शिमला के डीसी, एसपी की मौजूदगी में मामला शांत हुआ। इसमें सरकार और जिला प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि एससी-एसटी एक्ट के अनुसार पीडि़त परिवार को राहत दी जाएगी।
सिरमौर के जिला कल्याण अधिकारी विवेक अरोड़ा ने बताया कि एससी-एसटी एक्ट के अनुसार इस मामले में पीडि़त परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, पत्नी को पेंशन और लगभग 8.25 लाख के नकद मुआवजे का प्रावधान है। पीडि़त के बच्चों को निशुल्क शिक्षा भी मिलेगी।
उधर, उपायुक्त ललित जैन ने बताया कि पीडि़त को एससी एसटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार तमाम सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। यदि परिवार को राशन आदि की जरूरत है तो प्रशासन कुछ महीने का राशन भी दे सकता है। उन्होंने कहा कि पीडि़त के अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये अलग से जारी किए हैं।
‘रात को हुए सारे हंगामे के बाद माकपा नेता राकेश सिंघा ने परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई। पत्नी को नौकरी और बच्चों को पढ़ाने की भी बात उठाई गई। अगर ऐसे मामलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग से जुडे़ कानून में बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का प्रावधान होगा और पत्नी को नौकरी देने की बात होगी तो वह सब भी किया जाएगा। मुआवजा भी देंगे। यह भी मांग उठाई गई कि इस मामले में सीबीआई जांच की जाए। हमने उन्हें कहा है कि अपराधियों के पकड़े जाने से मतलब है। उन्हें हम पकड़वा देंगे।’ - सुरेश भारद्वाज, शिक्षा मंत्री, हिमाचल सरकार।