शिमला के आईजीएमसी के सीटीवीएस विभाग ने 15 साल की लड़की की विकृत छाती का ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी दी है। बिलासपुर की घुमारवीं की रहने वाली बनीता की छाती के बायां हिस्सा अंदर धंस गया था। इससे लड़की को सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।
फेफड़ों पर भी इसका असर पड़ रहा था। चिकित्सकों का कहना है कि शरीर में इस तरह छाती का अंदर धंसना काफी घातक होता है। ऐसा होने पर ब्लड प्रेशर तथा दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। समय रहते इलाज न जाए तो हार्ट पर प्रेशर पड़ने से मौत भी हो सकती है।
तीन घंटों तक डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन किया। हिमाचल में इस तरह के उपकरणों के न मिलने के कारण भी ऑपरेशन में देरी हो रही थी।