देश के सम्मान का प्रतीक ‘जॉर्ज क्रास मेडल’ आखिर 13 साल बाद वापस हिमाचल आ रहा है। ब्रिटेन के उप उच्चायोग के अधिकारी सोमवार को मेडल लेकर बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) पहुंचेंगे। एक सादे समारोह में दूसरे विश्व युद्ध में पूरी यूनिट की जान बचाने के लिए खुद की कुर्बानी देने वाले घुमारवीं के भपराल निवासी किरपा राम की पत्नी ब्रह्मी देवी को सौंपा जाएगा।
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 13वीं फ्रंटीयर फोर्स राइफल में तैनात किरपा राम को सेना का सर्वोच्च सम्मान मरणोपरांत 1946 में उनकी पत्नी को दिया गया था। वर्ष 2002 में मेडल कैसे गायब या चोरी हुआ रहस्य बरकरार है।
ब्रह्मी देवी ने करवाई एफआईआर
हालांकि, ब्रह्मी देवी ने चोरी की एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। 2009 में इंग्लैंड में एक नीलामी घर में जब इसे सूचीबद्ध किया गया तो बिलासपुर के सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी एसएस चंदेल ने मामला उठाया। राज्य और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद मामला कोर्ट में पहुंचा।
मामला जस्टिस क्वीनंज बैंच लंदन डिवीजन में चलता रहा। जून 2013 में दोनों पक्षों की आपसी सहमति के बाद लंदन की अदालत ने मेडल वापस ब्रह्मी देवी को लौटाने के निर्देश दिए। हालांकि, इसके एवज में ब्रह्मी देवी को 12000 पाउंड (लगभग नौ लाख) रुपये दिल्ली के मूल निवासी अशोकनाथ जैन को देने थे।
इस तरह पूरी हुई मेडल पहुंचाने की प्रक्रिया
जैन ने पंजाब के तरणतारन निवासी कृपाल सिंह से मेडल खरीदा था। इंग्लैंड में रह रहे कुछ एनआरआई ने मेडल वापस भारत लाने के लिए ब्रह्मी देवी को नौ लाख रुपये की गुप्त राशि दी। हिमाचल में इस मामले को ब्रह्मी देवी के भतीजे एडवोकेट सुरेंद्र ठाकुर ने देखा जबकि लंदन में इंग्लैंड के सीनियर सोलीसीटर विजय शर्मा ने मामले की पैरवी की।
लंदन में तमाम औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वहां की सरकार ने इसकी प्रक्रिया आरंभ की। ब्रिटिश दूतावास के माध्यम से ब्रह्मी देवी तक बाकायदा पत्राचार भी किया गया। लेकिन समारोह करवाने में असमर्थ ब्रहमी देवी ने इसकी जानकारी पंचायत को दी। पंचायत ने उपायुक्त बिलासपुर को समारोह करवाने की गुजारिश की। 11 मई को भपराल स्थित पंचायत घर में समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
क्या है जॉर्ज क्रास की खासियत
जॉर्ज क्रास मेडल ब्रिटिश शासनकाल में शांतिकाल का सर्वोच्च सैन्य सम्मान माना जाता है। वर्तमान में मिलने वाले अशोक चक्र के समकक्ष ही यह सम्मान माना गया है। हिमाचल में महज एक ही सैनिक को यह सम्मान मिला था। जब यह सम्मान मिला, उस वक्त ब्रह्मी देवी की उम्र लगभग 14 वर्ष थी। बताया जाता है कि वह 13 वर्ष की आयु में ही विधवा हो गई थी।
उपायुक्त बिलासपुर मानसी सहाय ठाकुर इस संदर्भ में पंचायत की ओर से उन्हें पत्र मिला है। प्रशासन सोमवार को गांव में एक समारोह का आयोजन करेगा। उप उच्चायोग के तीन अधिकारी आएंगे। हिमाचल के सैनिक कल्याण मंत्री धनी राम शांडिल भी इस समारोह में उपस्थित रहेंगे।