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प्रोजेक्ट मिलने के एक साल बाद बनी कंपनी को बनाया था ब्रैकल ने साझीदार

Sun, 25 Aug 2019 12:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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अंतरराष्ट्रीय कंपनी ब्रैकल कॉरपोरेशन एनवी की ओर से 960 मेगावाट क्षमता वाला जंगी थोपन पोवारी प्रोजेक्ट हासिल करने को किए गए फर्जीवाड़े में कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। विजिलेंस जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी ने साल 2006 में सरकार से जिस प्रोजेक्ट को अकेले काम करने के लिए हासिल किया, उसे हासिल करने के एक साल बाद जालंधर (पंजाब) में रजिस्टर हुई एक कंपनी के साथ साझा कर लिया। विजिलेंस मामले में कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।

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साल 2006 में अंतरराष्ट्रीय कंपनी होने का दावा करने वाली ब्रैकल कॉरपोरेशन एनवी को प्रोजेक्ट मिला तो उसने इसे किसी के भी साथ साझे तौर पर लेने या किसी कंपनी को स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) या सब्सिडरी कंपनी के साथ की सरकार को जानकारी नहीं दी। ऐसे में सरकार ने उसे प्रीमियम जमा करने के लिए कहा, लेकिन कंपनी टालमटोल करती रही।

जब उसे शोकॉज नोटिस जारी किया गया तो ब्रैकल कॉरपोरेशन ने सरकार को 173.42 करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम भी भर दिया। विजिलेंस जांच में यह बात सामने आई है कि यह पैसा ब्रैकल कॉरपोरेशन की बजाय नई बनी ब्रैकल किन्नौर पावर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने जमा किया है। इसके तार उद्योगपति अडानी से जुड़े बताए जा रहे हैं।
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खास बात यह है कि इस ब्रैकल किन्नौर पावर प्राइवेट लिमिटेड शिमला जिस पते पर रजिस्टर हुई वह पहले से इंटर ड्रिल रिपेयर एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का दफ्तर था। अब विजिलेंस इस बात की भी जांच करने की तैयारी में है कि आखिर इस कंपनी के साथ क्या लिंक था जिसकी वजह से एक नई कंपनी ने इतनी पड़ी रकम दूसरी कंपनी के नाम पर जमा कर दी। 

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