मनाली-लेह मार्ग को पूरा साल बहाल रखने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके तहत सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण शिंकुला दर्रे को भेदकर विश्व की सबसे ऊंची टनल बनेगी। टनल टू-वे होगी। यानी फोरलेन की तर्ज पर एक टनल आने और एक जाने के लिए बनेगी। यह जानकारी बीआरओ के डीजी राजीव चौधरी ने शिंकुला दर्रा बहाल करने के दौरान मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि टनल का कार्य जल्द आरंभ होगा और तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगी।
इसके बनने से सेना को लेह-लद्दाख में चीन से सटी सीमा तक पहुंचने में मदद मिलेगी। 16580 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस दर्रे पर 4.2 किलोमीटर लंबी टनल बनने से कारगिल की मनाली से दूरी 355 की जगह 60 किलोमीटर कम होकर 295 किलोमीटर रह जाएगी। मनाली-लेह-कारगिल रूट के लिए यह वैकल्पिक है। अभी विश्व में दस हजार से अधिक की ऊंचाई पर अमेरिका में 2.7 किलोमीटर लंबी टनल बनी है।
शिंकुला दर्रे पर टनल बनने के बाद यह रिकॉर्ड हिमाचल के नाम हो जाएगा। डीजी राजीव चौधरी ने कहा कि टनल बनने के बाद लाहौल और जंस्कार क्षेत्र के लोग आसानी से आ-जा सकेंगे। इसके अलावा इन क्षेत्रों में पर्यटन के द्वार भी खुलेंगे। अटल टनल बनने के बाद लाहौल घाटी की ओर आने वाले पर्यटकों की संख्या में 622 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। एक साल में नौ लाख से अधिक पर्यटक लाहौल आए। आने वाले समय में लद्दाख और जंस्कार घाटी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर बीआरओ की योजक और दीपक परियोजना के अधिकारी भी मौजूद रहे।
शिंकुला दर्रा दो माह पहले बहाल, पर्यटक वाहन अभी नहीं जा सकेंगे
लेह-लद्दाख की जंस्कार घाटी को लाहौल से जोड़ने वाले शिंकुला दर्रा को यातायात के लिए इस बार दो माह पहले ही बीआरओ ने बहाल कर दिया। दर्रे से बर्फ हटाने के बाद शनिवार को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के डीजी राजीव चौधरी ने रिबन काटने के बाद लेह-लद्दाख के जंस्कार से आए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर इस मार्ग पर रवाना किया।
हालांकि अभी दर्रा पर्यटक वाहनों के लिए बंद रहेगा। बीआरओ ने इस वर्ष रिकॉर्ड समय में इस मार्ग को बहाल किया है। इससे पहले यह मार्ग जून में बहाल होता था। शिंकुला दर्रा में बीआरओ के डीजी को तोद घाटी के ग्रामीणों ने पूर्व जिला परिषद सदस्य रिगजिन हायरपा की अगुवाई में लाहौली परंपरा के अनुसार खतक व टोपी पहनाकर अभिनंदन किया।