गुणवत्ता और सरकारी उपक्रम के नाम पर हाथोंहाथ मिल्कफेड की तैयार की मिठाईयों को ग्राहकों ने खरीदा लेकिन उन्हें मालूम ही नहीं कि वे इसमें ठगे गए। मिल्कफेड के कुछ उत्पादों में प्रिंट रेट और मिल्कफे ड की अपनी ही तैयार रेट लिस्ट में 35 रुपये का अंतर था।
उत्पादों में रेट प्रिंट था, तो ग्राहकों को भी बिना किसी बहस के उतना ही पैसा चुकाकर उत्पाद खरीदने पर मजबूर होना पड़ा। राजधानी शिमला में ही निजी रिटेल दुकानों पर सरेआम लूट का मामला सामने आया। मिल्क फेड ने तीन सौ क्विंटल तैयार की मिठाइयों को पूरे प्रदेश भर में बेचा।
निश्चित तौर पर अन्य भागों में लगाए गए निजी रिटेल दुकानों में भी इसी तरह से ग्राहक लूटे गए होंगे। मिल्कफेड की दिवाली के लिए तैयार कर बेची गई मिठाईयों में गोलमाल हुआ है। मिल्क फेड ने टिन पैकिंग में गुलाब जामुन, अंगुरी पेठा और रसगुल्ले की एक एक किलो की पैकिंग को बेचा है।
पोस्टर/रेट लिस्ट में इसके दाम 160 रुपये प्रति किलो प्रिंट है लेकिन इन उत्पादों में मिल्कफेड ने ही 195 रुपये भी प्रिंट करवा रखा है। मिल्कफे ड ने छोटे रिटेलर को दस रुपये प्रति 400 ग्राम और कुछ उत्पादों में प्रतिकिलो 800 ग्राम की खरीद पर दस रुपये की छूट दे रखी थी।
मिठाई बड़े रिटेलर को थोक भाव के रूप में और कम रेट पर उपलब्ध करवाई गई। इससे जाहिर है कि माल रोड पर ही जब 160 रुपये का उत्पाद प्रिंट 195 रुपये प्रति किलो पर बिका तो शहर के बाहर और प्रदेश में भी इसी तरह से लूट हुई होगी। हालांकि शहर के कुछ रिटेलर ने मिल्क फेड की रेट लिस्ट दुकान पर लगाकर ही माल बेचा है।
मिल्क फेड ने दीवाली के सीजन में पूरे प्रदेश में तीन सौ क्विंटल मिठाईयां अपने ब्रांड के नाम से बेची हैं। सभी रिटेल आउटलेट पर जरूरी नहीं कि मिल्कफेड की रेटलिस्ट उपलब्ध रही हो, इससे जाहिर है कि कम से कम गलत प्रिंट हुए इन तीन उत्पादों में तो ग्राहक के साथ ठगी हुई है।
मिल्कफेड के दसवें माह में पैक हुए इन उत्पादों के प्रिंट रेट की उसे मार्केट में उतारने से पहले प्रबंधकों को जानकारी न रही हो, ऐसा संभव नहीं। उत्पाद आने के बाद ही मिल्कफेड ने रेट लिस्ट तय की थी, प्रिंट रेट 35 रुपये अधिक कैसे हुआ। यदि प्रिंट हो गया था तो उसके ऊपर मिल्कफेड अपनी रेट स्लिप लगाकर लूट रोक सकता था लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं।
मिल्क फेडरेशन के एमडी एके ठाकुर ने माना कि तीन आइटम में रेट अधिक प्रिंट हो गया था। बाद में ग्राहकों को 195 के बजाय 160 रुपये रेट तय किया। कम रेट की फाइनल रेट लिस्ट हर रिटेलर को उपलब्ध करवाई गई थी। उन्होंने माना कि प्रिंट अधिक हुआ था लेकिन यदि बोलने के बावजूद प्रिंट रेट वसूला गया है तो इसमें रिटेलर की गलती रही है।