फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुड़िया केस पर हिमाचल विधानसभा में हंगामा, भाजपा ने किया वॉकआउट

Wed, 23 Aug 2017 01:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन मंगलवार को खूब हंगामा हुआ। गुड़िया मामले और कानून-व्यवस्था पर सारा काम रोककर नियम-67 में चर्चा मांगते हुए विपक्ष अपनी जिद पर अड़ा रहा।
विज्ञापन


मगर स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने राज्य सरकार से जवाब आने के बाद ही इसकी अनुमति दे पाने की बात की तो नाखुश विपक्ष ने इसे मानने से इंकार किया। इसके बाद 15 मिनट के लिए सदन की बैठक को स्थगित कर स्पीकर ने अपने चैंबर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य बुलाए, मगर यहां भी सहमति न बनने के बाद दूसरी बार हाउस शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की।

सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए वे वेल में चले गए और उन्होंने चेयर का भी घेराव किया। कुछ समय तक खूब शोर-शराबा रहा। फिर हंगामे के बीच करीब 12 बजकर 5 मिनट पर स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने सदन की कार्यवाही को बुधवार को 11 बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।
विज्ञापन


हिमाचल की 12वीं विधानसभा के इस आखिरी मानसूत्र सत्र की कार्यवाही पहले दिन मंगलवार को 11 बजे शुरू हुई। विपक्ष के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने बहुचर्चित गुड़िया मामले की छानबीन में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रश्नकाल को स्थगित करके प्रदेश में कानून-व्यवस्था के बिगड़े हुए हालात पर चर्चा की जाए।

नहीं थमा हंगामा, स्‍थगित करना पड़ा सदन

इसका संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विरोध कर कहा कि ये मामला अर्द्धन्यायिक है और इस पर चर्चा नहीं हो सकती। भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि ने भी कहा कि 16 साल की बच्ची का रेप करने के बाद उसकी हत्या की गई। इसकी छानबीन में कोताही करने वाले अधिकारियों को सस्पेंड नहीं किया गया। रोहडू़ में एक युवती को दराती से मारा गया।

प्रदेश में ये एक मामला नहीं, ऐसे कई प्रकरण हैं। इस पर स्पीकर बुटेल ने दोहराया कि सरकार की टिप्पणी के बाद ही इस पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जहां तक गुड़िया मामले की जांच है तो इस पर हिमाचल सरकार ने ही कोर्ट से सीबीआई जांच की मांग उठाई है, जिसके बाद मामला सीबीआई को गया है। अब सीबीआई की जांच के पूरा होने का इंतजार किया जाना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने गुड़िया मामले पर कहा कि आज के समय में इससे गंभीर विषय चर्चा के लिए कोई हो ही नहीं हो सकता। इसीलिए इस पर चर्चा की जानी चाहिए। धूमल के बाद संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी कहा कि बाढ़ राहत पर विपक्ष की ओर से ही चर्चा लगाई गई है। पहले इस पर ही चर्चा होनी चाहिए। राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि वे कानून-व्यवस्था पर भी चर्चा के लिए तैयार हैं, मगर नियम 130 में ही जवाब देंगे।

इस पर धूमल बोले कि अगर नियम 130 में ही चर्चा करवानी है तो नियम 67 किस मर्ज की दवा है। काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा के लिए इससे गंभीर विषय कोई नहीं हो सकता। स्पीकर ने कुछ समय के लिए हाउस को स्थगित कर इस पर चैंबर में बात करने को कहा। करीब पौने 12 बजे सदन की कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया।

इसी बीच स्पीकर के चैंबर में हुई बैठक में भी काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा करने पर सहमति नहीं बन पाई। 12 बजे से पहले ही विपक्ष के सदस्य बाहर आए। उन्होंने जमकर नारेबाजी की। तब विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही सदन की कार्यवाही में सत्ता पक्ष ने हिस्सा लिया। प्रतिपक्षी सदस्य इसी दौरान वेल में चले गए और नारेबाजी करते रहे। हंगामा थमता न देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को अगले दिन के लिए स्थगित कर दिया।

वक्ताओं के माइक पर ही की नारेबाजी

सत्र के पहले दिन खराब कानून व्यवस्था को लेकर चल रही नारेबाजी के दौरान भाजपा विधायकों ने वक्ताओं के माइक तक छीन लिए। विरोध के बीच जब विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल के कहने पर ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया बोलने के लिए उठे और माइक ऑन किया तो भाजपा विधायकों ने उनके आगे से माइक हटा दिया।

यही नहीं, उसी माइक पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद राकेश कालिया बोलने के लिए उठे, तो चूंकि उनकी सीट पीछे थी तो भाजपा विधायकों ने जोर जोर से नारेबाजी की ताकि वह अपनी बात न रख सकें। इसके बाद विधायक कुलदीप कुमार के उठने पर भी उनके माइक को विधायकों ने छीन जमकर नारेबाजी की।

मंत्री मुकेश और हंसराज में जमकर नोकझोंक
भाजपा विधायकों के जबरदस्त हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई को दिन के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच वेल में नारेबाजी कर रहे विधायकों और संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री के बीच बहस हो गई। चंबा के चुराह से विधायक हंसराज और मुकेश में तो जमकर नोकझोंक होने लगी। हालात खराब होता देख भाजपा व कांग्रेस के विधायकों ने मध्यस्थता कर विवाद को खत्म कराया।

बिंदल को क्या कह गए वीरभद्र
भाजपा विधायकों के हंगामे और मंत्री-विधायक में नोंकझोंक के बाद विधायक राजीव बिंदल और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह में बहस हो गई। इस दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र ने बिंदल को कुछ बोला। इसके बाद भी बिंदल अपनी बात कहते रहे तो सीएम पास आ गए और उन्होंने फिर कुछ कहा। उनके कहने पर बिंदल झुके और सम्मान से आगे बढ़े लेकिन फिर सीएम पलटकर चले गए। बिंदल ने कहा कि उन्होंने सुनने का प्रयास तो किया लेकिन उन्हें समझ ही नहीं आया कि मुख्यमंत्री बोल क्या गए।
विज्ञापन

दो स्वीकृत विधेयक सदन पटल पर रखे

राज्यपाल से स्वीकृति के उपरांत सरकार ने दो विधेयक सदन के पटल पर रखे। हिमाचल प्रदेश चिकित्सीय सेवा (व्यक्ति तथा चिकित्सीय सेवा संस्था, हिंसा और संपत्ति के नुकसान का निवारण) संशोधन विधेयक 2017 पटल पर रखा गया। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर विधेयक संशोधन विधेयक 2017 सदन में लाया गया।

विधेयकों के अलावा सरकार ने हिमाचल प्रदेश एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस रूल्स 1973 के नियम 23 के उपनियम 5 में प्रस्ताव पेश किया है। एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के अधीन आने वाले कर्मचारियों को विशेष भत्ते अनुमन्य होंगे जिन्हें सरकार समय समय पर घोषित करती है। कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने हिमाचल प्रदेश कृषि औद्योनिकी और वानिकी विश्वविद्यालय  के अधिनियम 1986 की धारा 45 के अंतर्गत कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 सदन के पटल पर रखा।

उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री हिमाचल प्रदेश  सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, जिला लोक संपर्क अधिकारी, सूचना अधिकारियों की भर्ती और  प्रोन्नति नियम 2017 को विधानसभा में रखा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनी राम शांडिल ने हिमाचल प्रदेश सैनिक कल्याण विभाग के अराजपत्रित विभिन्न संवर्गों के भर्ती और प्रोन्नति नियम 2017 को सदन में रखा है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें