विपक्ष की ओर से राज्यपाल के अभिभाषण में तीन संशोधन का प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष द्वारा खारिज किए जाने पर शुक्रवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि बिना हाउस में चर्चा के लिए लाए कोई प्रस्ताव कैसे खारिज हो सकता है। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने नियमों के तहत प्रस्ताव खारिज करने की बात कही।
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इस पर विपक्ष और विधानसभा अध्यक्ष के बीच नोकझोंक भी हुई लेकिन बुटेल प्रस्ताव खारिज करने पर ही अड़े रहे। नाराज विपक्षी विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया। सत्र के पहले दिन राज्यपाल आचार्य देवव्रत के अभिभाषण के बाद भाजपा विधायक दल की ओर से इसमें संशोधन के लिए तीन प्रस्ताव रखे थे।
इसमें केंद्र की ओर 61 नेशनल हाईवे देने का जिक्र और इसके लिए केंद्र सरकार का आभार जताने, भाजपा की राज्यपाल को सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री के खिलाफ सौंपी गई चार्जशीट और 14 वें वित्त आयोग से पंचायतों को मिलने वाली राशि और उसके लिए केंद्र का धन्यवाद करना शामिल था। विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए विपक्ष के प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि तीनों ही बातें अभिभाषण में मौजूद हैं।
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संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी यही बात कही। इस पर विपक्ष का कहना था कि आखिर सदन में लाए बिना कैसे अध्यक्ष अपने स्तर से किसी प्रस्ताव को खारिज कर सकते हैं। विधानसभा अध्यक्ष विपक्ष की ओर से मांग नहीं मानने पर अंत में विपक्ष ने वाकआउट कर दिया।
धूमल बोले, हमारे समय विपक्ष सोया रहा तो हम क्या करें
संशोधन को लेकर चल रही तकरार के बीच जब संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने प्रो धूमल के 10 साल सदन के नेता रहने के दौरान कभी संशोधन न लाने की बात कही तो धूमल ने इसपर जबरदस्त पलटवार किया। बोले, दस साल विपक्ष सोया रहा तो हम क्या करें।
नियमों के तहत संशोधन लाया जा सकता है इसलिए हम संशोधन लाने और सदन में चर्चा की मांग कर रहे हैं। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष को विभिन्न उदाहरण देकर बिना सदन में लाए प्रस्ताव को खारिज करने पर समझाने का प्रयास विफल होने पर धूमल ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारे लिए सदन में बैठना मुश्किल होगा।
मुख्यमंत्री बोले-ऐसा पहले कभी नहीं हुआ
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अभिभाषण पर संशोधन को लेकर विपक्ष के वाकआउट पर कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। ऐसा पहली बार हुआ कि राष्ट्रपति या राज्यपाल के अभिभाषण में विपक्ष संशोधन की मांग करे और फिर वाकआउट करे। सीएम ने कहा कि कभी भी राज्यपाल या संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण में कोई संशोधन नहीं लाया जाता।
कितना लेंटाना घास उखाड़ी, मौके पर देखेंगे विधायक
वन भूमि से कितना लेंटाना घास उखाड़ा है? इसकी वास्तविकता जांचने विधायक मौके पर जा सकते हैं। संबंधित क्षेत्र के डीएफओ भी साथ रहेंगे। विधानसभा में भाजपा विधायक राजीव बिंदल ने लेंटाना घास उखाड़ने के मामले में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इसके बाद वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने विधायकों को मौके पर जाकर वास्तविकता का पता करने की बात कही।
उन्होंने डीएफओ को निर्देश दिए कि वे विधायकों के साथ मौजूद रहेंगे। भरमौरी ने कहा कि सरकार ने काफी मात्रा में लेंटाना घास को उखाड़ा है। राज्य की वन भूमि में 235492 हेक्टेयर क्षेत्र में लेंटाना घास है। चार साल में इस पर 82.52 करोड़ खर्चे गए हैं। वन भूमि में फैले लेंटाना के जड़ से खात्मे को 20 वर्ष लगेंगे। इसे रूट स्टाक विधि से काटा जा रहा है। लेंटाना पक्षियों और भेड़-बकरियों की बीट से फैलता है। इसका बीज जहां गिरता है, वहां यह फैल जाता है।
भरमौरी ने कहा कि लेंटाना गंभीर समस्या है। यह 4500 फीट से नीचे फैलता है। 2013-14 से लेंटाना घास उखड़ाने को विशेष अभियान चलाया है। इसे जड़ के उखाड़ने के बाद जमीन पर बैंबू, कचनार, तूनी, सफेदा, शीशम, सांगवान आदि के पौधे लगाए गए हैं। कांगड़ा के नूरपुर क्षेत्र में यह बड़े पैमाने पर फैला था। वहां इसके खात्मे को अभियान चलाया है। धर्मशाला में 1332 हेक्टेयर, नाहन में 672 हेक्टेयर और मंडी में 575 हेक्टेयर में नए पौधे लगाए हैं। बिंदल ने आरोप लगाया कि वन विभाग लेंटाना घास के प्रति गंभीर नहीं है। इसकी ऊपर से छंटाई की जा रही है, जबकि जड़ों को नहीं उखाड़ा जा रहा है।
नेरचौक में अगस्त से बैठेंगी एमबीबीएस कक्षाएं
ईएसआई मेडिकल कालेज नेरचौक में अगस्त से एमबीबीएस कक्षाएं शुरू होंगी। कॉलेज में 100 सीटों पर छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। चंबा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों में भी इसी साल एमबीबीएस कक्षाएं बैठाना प्रस्तावित है। बशर्ते, इसके लिए टीचिंग फैकल्टी और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी हों। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने यह जानकारी भाजपा विधायक गुलाब सिंह के प्रश्न के उत्तर में दी। भाजपा विधायक ने पूछा था कि नेरचौक में सरकार कब से छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश देगी। निरीक्षण करने के लिए एमसीआई टीम ने क्या रिपोर्ट दी है? स्वास्थ्य मंत्री ने कौल सिंह ने कहा कि एमसीआई ने जो आपत्तियां लगाई थीं, उन्हें दूर कर दिया है।
कॉलेज में प्रिंसिपल के अलावा विभिन्न श्रेणी के 335 पद भरे हैं। नाहन कॉलेज में एमबीबीएस कक्षाएं शुरू हो गई हैं। कहा कि नेरचौक के अलावा नाहन, चंबा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज कांग्रेस की देन है। यूपीए सरकार के समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नांडीज ने ईएसआई मेडिकल कॉलेज को मंजूर किया था। केंद्र में सत्ता परिवर्तन के उपरांत एनडीए सरकार ने इसे राज्य सरकार को अपने अधीन लेने को कहा और इसके संचालन से इनकार किया। एनडीए सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. हर्षवर्धन ने एम्स देने की बात कही थी। बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जीपी नड्डा ने इस बात को आगे बढ़ाया। नेरचौक कॉलेज का विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए हिमाचल को 285 करोड़ 5 किस्तों में केंद्र सरकार को देने हैं।
जमीन उपलब्ध कराने को धूमल कर रह सहयोग
कौल सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के लिए जमीन उपलब्ध कराने को नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल सहयोग कर रहे हैं। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला और शिक्षा बोर्ड भवन के अलावा आयुर्वेद के भवन को लेने के लिए सरकार आगे बढ़ रही है।
धूमल बोले, सदन को गुमराह कर रहे स्वास्थ्य मंत्री
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि स्वास्य मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं। कहा कि ऑस्कर फर्नांडीज उनके मित्र हैं। उनकी सरकार के आग्रह पर ईएसआई मेडिकल कॉलेज मिला है। कहा कि कांग्रेस ने जल्दबाजी में ईएसआई मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करवाया है। मेडिकल कॉलेज के मामले पर हेलीकाप्टर में मंत्रियों को दिल्ली ले जाया गया। इसका बाद में चुनाव आयोग के संज्ञान पर कांग्रेस को इसका किराया भरना पड़ा। कहा कि हमीरपुर में स्कूलों को मर्ज कर या किसी अन्य तरीके से मेडिकल कॉलेज चले, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
मुख्यमंत्री को धर्मशाला में हॉलीलॉज बनाने का न्योता
बजट सत्र के तीसरे दिन विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का अनुसमर्थन करते हुए कांग्रेस विधायक संजय रत्न ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपर और लोअर हिमाचल की खाई को खत्म करने का श्रेय दिया। धर्मशाला में भी हॉलीलॉज (शिमला में स्थित मुख्यमंत्री का निजी आवास) बनाने का न्योता दिया। इस पर भाजपा विधायक रविंद्र रवि चुटकी लेते हुए बोले - संजय रत्न ने मुख्यमंत्री को धर्मशाला बुलाया है।
ऐसे में मुख्यमंत्री को वहां से चुनाव लड़ना चाहिए। रवि ने सुधीर शर्मा की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब उन्हें नया विधानसभा क्षेत्र तलाश लेना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री अपनी सीट से खड़े हो गए और बोले - मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है। इस पर खूब ठहाके लगे। संजय रत्न ने स्कूल शिक्षा बोर्ड का कार्यालय धर्मशाला ले जाने का श्रेय भी मुख्यमंत्री को दिया। इसका भाजपा विधायकों ने विरोध किया। रविंद्र रवि ने कहा बोर्ड का कार्यालय शांता कुमार के कार्यकाल के दौरान शिमला से शिफ्ट हुआ था।
इस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बोले - धर्मशाला में सिर्फ उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक सहित जिला स्तर के कार्यालय होते थे। कांग्रेस सरकार ने स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय को शिमला से धर्मशाला भेजा था। कहा कि चीफ इंजीनियर स्तर के लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य और राज्य बिजली बोर्ड के कार्यालय कांग्रेस ने धर्मशाला में खोले। हिमाचल में एकता बनी रहे, इसके लिए सरकार हमेशा प्रयासरत रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने हमेशा नए और पुराने हिमाचल की राजनीति की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल एक है और एक ही रहेगा।
भत्ता देकर निठल्ले नहीं बनाने युवा
कांग्रेस विधायक संजय रत्न ने कहा कि कांग्रेस सरकार हिमाचल के युवाओं को निठल्ला बनाकर भत्ता नहीं देना चाहती। हमारी सरकार युवाओं को तकनीकी तौर पर दक्ष कर रही है। कांग्रेस सरकार कौशल विकास भत्ता दे रही है।
नोटबंदी की परेशानियाें से कराया अवगत
मुख्य संसदीय सचिव जगजीवन पाल और विधायक संजय रत्न ने आठ नवंबर की रात को हुई नोटबंदी से परेशान जनता की समस्याओं को सदन में उठाया। दोनों नेताओं ने कहा कि नोटबंदी से देश कई साल पीछे चला गया है। बैंक से पैसा निकालने पर अब सर्विस चार्ज लगाकर लोगों को और परेशान किया जा रहा है।