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विस चुनावः ना-ना करते मुख्यमंत्री चेहरे पर भाजपा ने लिया यू टर्न

Wed, 01 Nov 2017 01:47 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : SELF
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विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे पर भाजपा ने यू टर्न लिया है। आखिरी समय में प्रो. प्रेम कुमार धूमल को चेहरा बनाने के बाद अब सवाल खड़े हो गए हैं। अब तक पीएम मोदी के चेहरे को आगे रखकर चुनाव में उतरी भाजपा को आखिर अपनी रणनीति क्यों बदलनी पड़ी। 
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हिमाचल पहुंचते ही यह एलान नहीं किया। साफ है कि सोमवार देर रात शिमला में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा के बाद सीएम चेहरे पर फैसला हुआ। शाह ने धूमल को भी वार्ता के लिए शिमला बुलाया। 

सूत्रों के मुताबिक धूमल को चेहरा बनाने में ग्राउंड रिपोर्ट अहम रही। पार्टी के मिशन 50 प्लस के लिए धूमल को आगे लाने का फीडबैक प्रदेश में मौजूद केंद्रीय नेताओं की ओर से दिया गया। भाजपा के प्रचार अभियान में अभी तक पीएम मोदी का चेहरा ही आगे रखा गया। 
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सीएम के चेहरे पर पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह समेत तमाम केंद्रीय नेता पार्लियामेंट्री बोर्ड से फैसला होने की बात कहते रहे। पार्टी की प्रचार रणनीति में धूमल के साथ शांता और नड्डा के अलावा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती का कद एक सा दिखाया गया। 

होर्डिंग और पोस्टरों में इन चारों को बराबर जगह दी। आचार संहिता की घोषणा से ठीक पहले पीएम मोदी की बिलासपुर जनसभा से केंद्रीय नेता नड्डा का कद बढ़ा दिखा, तो धूमल को हमीरपुर की जगह नए क्षेत्र सुजानपुर भेजने को उनके लिए चुनौती से जोड़कर देखा गया।

शाह के पास उठा था नेतृत्व का मुद्दा

सूत्रों के मुताबिक स्टार प्रचार शुरू होने से पहले एक बार फिर नेतृत्व का मुद्दा शाह के पास उठा। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल की अगुवाई में नेतृत्व के मुद्दे पर प्रदेश भर से फीडबैक जुटाया गया। 

केंद्रीय नेतृत्व ने धूमल के नाम पर आम सहमति बनाई, लेकिन घोषणा को लेकर टाइमिंग तय नहीं हुई। पार्टी का दृष्टिपत्र जारी करने पहुंचे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अनुभवी नेता को सीएम पद पर बैठाने की बात कहकर संकेत दिए। 

इसके बाद 30 अक्तूबर को शाह हिमाचल प्रवास पर पहुंचे। पहले दिन उन्होंने चंबा और कांगड़ा जिले का दौरा किया। वहां से देर शाम शिमला पहुंचकर उन्होंने चुनाव प्रबंधन में लगे रामलाल, प्रदेश चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत, प्रभारी मंगल पांडेय, केंद्रीय चुनाव समिति सचिव जेपी नड्डा और महामंत्री संगठन पवन राणा के साथ बैठक की। 

इस बीच धूमल को भी शिमला बुला लिया गया। इसी बैठक के बाद समीकरण बदले। शाह मंगलवार सुबह शिमला से कांगड़ा के इंदौरा गए, लेकिन वहां सीएम के नाम की घोषणा नहीं की। दोपहर बाद सिरमौर के राजगढ़ जाकर उन्होंने धूमल के नाम की घोषणा कर चौंका दिया।

हिमाचल में बदली यूपी और उत्तराखंड की रणनीति

भाजपा ने पहले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सफल रही रणनीति को ही हिमाचल में अपनाया। मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं देने का दबाव पार्टी ने उत्तराखंड में भी झेला लेकिन कांग्रेस के बार-बार मुद्दा उठाने के बाद चेहरा नहीं दिया।

हिमाचल में भी कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री चेहरे पर भाजपा को घेरती रही। नड्डा और धूमल कैंप के बीच खींचतान तक का मुद्दा कांग्रेस ने उठाया। आखिर अंत में भाजपा को अपनी रणनीति में बदलाव कर सीएम उम्मीदवार घोषित करना पड़ा।

चुनावी मुद्दा बनने का चिंता
मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम पर भाजपा ने मुहर लगाकर विपक्षी दल कांग्रेस को चुनावी मुद्दा थमा दिया है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के सीएम चेहरे पर पलटवार के लिए कांग्रेस के वार पर पार्टी पलटवार की तैयारी कर रही है। मोदी चेहरे की जगह धूमल चेहरा बनने से पार्टी को विपक्ष का दोहरा हमला झेलना पड़ेगा। 2 नवंबर से मोदी का हिमाचल दौरा शुरू हो रहा है। ऐसे में भाजपा मंथन कर रही है कि प्रचार की आगामी रणनीति में धूमल और मोदी में कैसे संतुलन बनाया जाए।
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धूमल की बढ़ी चुनौतियां

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा का धूमल पर खेला दांव से कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व की माने तो पार्लियामेंट्री बोर्ड धूमल के नाम पर पहले मुहर लगा चुका है। धूमल को बतौर सीएम प्रोजेक्ट करने की टाइमिंग पार्टी की रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है।

धूमल का प्रदेश की राजनीति में खासा प्रभाव माना जाता है, लेकिन पार्टी में धड़ेबाजी भी छिपी नहीं है। सभी खेमों को साधने के साथ धूमल के कंधों पर 50 प्लस का जिम्मा भी आ गया है। टिकट आवंटन की प्रक्रिया के पक्ष में भी धूमल नहीं रहे।

इसके बाद टिकटों के आवंटन में भी आंतरिक सर्वेक्षणों और संघ की रिपोर्टों को आधार बनाया गया। अब आखिरी क्षणों में उनके फ्रंट पर आने के साथ टिकट आवंटन के असंतोष से जूझना होगा। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने तमाम समीकरणों के लिए अब धूमल काफी हद तक जबावदेह होंगे।
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