पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य को स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेष सहायता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में सक्रिय भागीदारी जरूरी है। डॉ. सैजल ने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि स्वास्थ्य मंत्री बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए और स्वास्थ्य सचिव ने बैठक बीच में क्यों छोड़ी। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि राज्य के स्वास्थ्य हित सरकार की प्राथमिकता हैं या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि राष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी भागीदारी और ठोस पैरवी से ही प्रदेश को अधिक योजनाओं, संसाधनों और वित्तीय सहयोग का लाभ मिल सकता है।