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आसमान से मेहमान नहीं आफत बनकर आ रहे परिंदे

Mon, 05 Jan 2015 12:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश में प्रवासी परिंदे बीमारियां लेकर पहुंच रहे हैं। कांगड़ा जिले के पौंग डैम में आने वाले 25 पक्षियों पर रेडियो कॉलर लगाकर किए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। प्रदेश वन विभाग और बांबे नेचुरल सोसाइटी की ओर से संयुक्त अध्ययन की रिपोर्ट आने के बाद वन महकमा सतर्क हो गया है।
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विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि हिमाचल में किस-किस प्रजाति के परिंदे कौन-कौन सी बीमारियां लेकर आ रहे हैं। नए सिरे से अध्ययन की तैयारी की जा रही है। प्रदेश सरकार ने 22 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है।

पौंग डैम के 25 पक्षियों पर रेडियो कॉलर व ट्रांसमीटर लगाकर एक अध्ययन किया गया था। यूरेशियन विजन, नार्दन पिन रिल, कामन रिल, रुड्डी शेल डक पर ट्रांसमीट और बार हेडेड गूज, ग्रे लैड गूज पर कॉलर लगाया गया था।
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तिब्बत चाइना और साइबेरिया से आ रहे पक्षी

सोसाइटी की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार ये विदेशी मेहमान अक्तूबर और नवंबर के बीच तिब्बत, चीन, साइबेरिया एवं रूस से आते हैं। फरवरी और मार्च तक इनकी वापसी शुरू हो जाती है।

कांगड़ा के पौंग डैम में प्रदेश के पक्षियों की 32 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। साल में ज्यादातर इन पक्षियों का वास स्थल पौंग डैम के ही आसपास पाया जाता है। इस साल पौंग डैम में बार हेडेड गूज तकरीबन 44 हजार से अधिक आ चुके हैं। यह अपने आप में रिकॉर्ड है।

प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव हिमाचल प्रदेश डा. ललित मोहन ने बताया कि  पांच साल पहले बर्ड फ्लू की बीमारी कई देशों में फैली थी। उसी को ध्यान में रखकर पिछले साल हिमाचल में आने वाले पक्षियों की बीमारियों पर अध्ययन कराया गया। यह अध्ययन कराया जाएगा कि ये परिंदे कौन-कौन सी बीमारियां लेकर आ रहे हैं।

वहीं अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण हिमाचल प्रदेश तरुण श्रीधर ने कहा कि बर्ड फ्लू की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पक्षियों की बीमारियों पर अध्ययन कराने को 22 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
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