ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला के साथ पूर्व में टकराव पर निदेशक ने कहा कि उन्हें सही जानकारी नहीं थी। मैं कभी भी निजी महाविद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर नहीं रहा। हालांकि पूर्व में उनके पास एक महाविद्यालय का अतिरिक्त कार्यभार था। पीटीए जनरल हाउस में जो निर्णय लेती है, संबंधित महाविद्यालय के प्रशासक और प्रधानाचार्य को वह लागू करना होता है।
पीटीए में विभाग और सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। धवाला जिस महाविद्यालय में पीटीए नियुक्ति में धांधली के आरोप लगा रहे हैं, वह वर्तमान में सरकारी हो चुका है। पूर्व में पीटीए पर नियुक्त सभी प्राध्यापक कालेज से निकाले जा चुके हैं। वर्तमान में एक भी पीटीए प्राध्यापक को नियुक्ति नहीं मिली है।