हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले की चार पंचायतों ने नशा तस्करों और नशे के जाल में फंसे लोगों से निपटने के लिए अपने-अपने हिसाब से योजनाएं बनाई हैं। जिले की तीन पंचायतों ने जहां चिट्टा आरोपियों का बहिष्कार करने की रणनीति बनाई है वहीं एक पंचायत ऐसी भी है जिसने नशा करने वालों को नई राह दिखाने का बीड़ा उठाया है। घुमारवीं उपमंडल की पट्टा पंचायत ने चिट्टे की लत से जूझ रहे युवाओं और अन्य नशा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए बड़ा फैसला लिया है। ग्रामसभा में तय किया गया कि नशा पीड़ितों को समाज से अलग-थलग करने के बजाय उन्हें सहानुभूति और पुनर्वास की सहायता दी जाएगी। पंचायत ने यह भी सुनिश्चित किया कि प्रभावितों को चिकित्सा, परामर्श और रोजगार के अवसर प्रदान कर समाज की मुख्य धारा में वापस लाने के प्रयास किए जाएंगे। पंचायत प्रधान रवि पाल सिंह ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को अगर सही समय पर मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो वे अपनी जिंदगी को दोबारा संवार सकते हैं। हम ऐसे व्यक्तियों के पुनर्वास पर काम करना चाहिए।