यात्री 1100 किलोमीटर की दूरी ट्रेन से महज एक दिन में पूरा कर सकेंगे। बर्फबारी के चलते मनाली से लेह तक महज छह महीने ही सड़क मार्ग खुले रहते हैं। ट्रैक बन जाने से प्रतिदिन ट्रेन लेह के लिए चलेगी।
सुरंगों के भीतर बनेंगे स्टेशन
इस रूट पर सुरंगों की संख्या काफी अधिक होने से कुछ रेलवे स्टेशन सुरंगों के भीतर ही बनेगी। इस रूट पर 75 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी।
ट्रैक बन जाने से चीन की सीमा तक सेना को रसद पहुंचाना आसान हो जाएगा। अंतिम लोकेशन सर्वे का काम रेल मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम राइट्स ने पूरा किया है। सर्वे तीन चरणों में किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने देश की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए कुल चार प्रोजेक्ट की पहचान की है।
इसमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश में मीसामारी-तेंगा-तवांग 378 किलोमीटर, असम और अरुणाचल प्रदेश में 249 किलोमीटर नार्थ लखीमपुर-बामे सलापत्थर, 227 किलोमीटर पासीघाट-तेजू-परशुरामकुड-रूपई और पंजाब-हिमाचल और लद्दाख इलाके में बनने वाले सबसे ऊंचा ट्रैक।
रेललाइन की कुल लंबाई लगभग 465 किलोमीटर होगी। इस रूट पर कुल 30 रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। जिस तरह से कश्मीर में ट्रेन चलाई गई है उसी तरह बिलासपुर और लेह दोनों ओर से पटरियों को बिछाने का काम शुरू किया जाए। -विश्वेश चौबे, महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे