हिमाचल प्रदेश की जसवां परागपुर सीट के विधायक एवं पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के नाम पर देश का सबसे बड़ा घोटाला हुआ है। सोमवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता में बिक्रम ठाकुर ने कहा कि ऊना के पेखूबेला में सौर ऊर्जा परियोजना का मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जुलाई माह में शिलान्यास किया है। उन्होंने कहा कि 32 मेगावाट के इस प्रोजेक्ट पर 220 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं जबकि गुजरात में 35 मेगावाट के सौर ऊर्जा परियोजना यानि तीन मेगावाट अधिक क्षमता वाले प्रोजेक्ट पर 144 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। पेखूबेला प्रोजेक्ट की मेंटनेंस संबंधित कंपनी आठ साल तक करेगी, जबकि गुजरात में कम लागत के बावजूद कंपनी दस साल तक प्रोजेक्ट की मेंटनेंस कर रही है। नियमों के मुताबिक सोलर प्रोजेक्ट पर 4.11 करोड़ रुपये प्रति यूनिट खर्च करना होता है, जबकि ऊना के पेखूबेला में 6.84 करोड़ प्रतियूनिट खर्च किया जा रहा है। विधायक ने कहा कि सरकार ने 2.90 रुपये प्रति यूनिट बिजली बेचने का निर्णय लिया है, इससे आने वाले 25 साल में भी प्रोजेक्ट की लागत पूरी नहीं हो पाएगा। ठाकुर ने कहा कि किसी भी प्रोजेक्ट को लगाने से पूर्व वहां भूमि का सर्वे करवाया जाता है, लेकिन ऊना में आंखें बंद कर प्रोजेक्ट लगा दिया गया, जिसका अधिकांश हिस्सा इस बरसात में आई बाढ़ के कारण बह गया है।