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हिमाचल के मंडी से ताजमहल देखने गए स्कूली बच्चों की बस पलटी, 57 घायल

Sat, 04 Nov 2017 09:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा/मंडी
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यमुना एक्सप्रेसवे पर एत्मादपुर क्षेत्र में झरना नाला पर सुबह साढ़े नौ बजे एक स्कूल की टूर बस पलटने से चालक की मौत हो गई। हादसे में 47 छात्र-छात्राओं समेत 57 लोग घायल हो गए।
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यह बस हिमाचल के मंडी जिले के कोटली के आलोक प्रसाद पब्लिक स्कूल की है। स्कूल के बच्चे ताजमहल देखने आ रहे थे। टायर फट जाने के बाद बस डिवाइडर से टकराई और पलटकर घिसटती चली गई। घायलों को चार निजी अस्पतालों और एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।



बस ( संख्या यूपी -एटी 1881) चंडीगढ़ के गोल्डन टूर एंड ट्रेवल्स की थी। स्कूल से कक्षा छह से 12 तक के बच्चों का टूर लेकर गुरुवार दोपहर 12 बजे टूर पर दो बसें चलीं। एक में 51 छात्र-छात्राएं और स्टाफ था। दूसरी बस में 47 छात्र-छात्राएं, पांच शिक्षक और पांच अन्य लोग ( टूर ऑपरेटर, रसोइया सहित) मौजूद  थे।
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मौके पर मची चीख पुकार

बस नोएडा से यमुना एक्सप्रेसवे से होते हुए आगरा आ रही थी। एत्मादपुर में झरना नाला के पास बस का टायर फट गया। अगले ही पल बस डिवाइडर से टकराई और पलटकर घिसटती चली गई। चीखपुकार मच गई।

आसपास जा रहे वाहन रुक गए। इनमें सवार लोगों ने ग्रामीणों की मदद से बस के शीशे तोड़कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।ट्रांस यमुना के फेज -2 निवासी राजेश चौहान रोडवेज बस में कंडक्टर है।

उसने यह बस पलटी देखी तो अपनी बस रुकवाई, सवारियों को उतारा और घायलों को बैठाया और अस्पताल पहुंचाया। घायलों को आकाश हॉस्पिटल, श्रीकृष्ण हॉस्पिटल, जय हॉस्पिटल, शांति मांगलिक हॉस्पिटल और एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

एजुकेशन टूअर पर गए थे 102 बच्चे

जानकारी के अनुसार स्कूल के 102 बच्चे वीरवार को दोपहर एक बजे  एजुकेशन टूअर पर रवाना हुए थे। कोटली के आस पास के ये सभी बच्चे यहां से दो बसों में गए थे और चंडीगढ़ में बसें बदली थी।

मथुरा, आगरा और जयपुर जाना था टूअर। सभी बच्चे कसान, दुरबल, डबाहन, खुरलाहन, गरनोटा गांवों के बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद परिजन बच्चों के साथ फोन पर संपर्क में हैं।

मृतक  और गंभीर रूप से घायलों की सूची

मृतक
हरीश शर्मा ( 40) पिता हंसराज, निवासी समखेरार, तहसील सदर, मंडी।

गंभीर रूप से घायल
आसीन (5) पुत्री अश्वनी कुमार, प्रीति पुत्री भूपेंद्र पाल सिंह (16), डिंपल (15) पुत्री जगदीश, अभिषेक (12) , पुष्पराज (रसोइया) पुत्र पूरन चंद, जितेंद्र (10) पुत्र प्रताप सिंह, महक (10) पुत्री प्रेम सिंह, कंचन (28) पत्नी अश्वनी, प्रांजल (12) पुत्री अश्वनी, हिमांशु (06) पुत्र महेश कुमार, अंकिता ( कक्षा 12वीं)। 

हेल्पलाइन नंबर जारी
7055532223, 8171742663, 9418379507,9857148884, 9359398001

मंडी प्रशासन को किया सूचित
सभी घायलों के उपचार की समुचित व्यवस्था की गई है। मंडी के जिला प्रशासन, एसपी को भी सूचना दे दी है। उनके माध्यम से बच्चों के परिजनों तक जानकारी भिजवा दी गई है।- गौरव दयाल, डीएम, आगरा

टायर फटने से हुआ हादसा
हादसा बस का टायर फट जाने से हुआ है। सभी घायलों का उपचार कराया जा रहा है। सभी जगह पुलिस को लगाया गया है। उपचार में खून की कोई कमी नहीं होगी, व्यवस्था कर दी गई है।- अमित पाठक, एसएसपी
 

छात्र का हाथ व रसोइए का पैर कटा

हादसे में घायल छात्र-छात्राओं में अभिषेक (कक्षा 12वीं) का दायां हाथ कट गया। जबकि रसोइए पुष्पराज का पैर कट गया। उसकी हालत भी नाजुक  है।
अलग वार्ड में उपचार
गंभीर रूप से घायलों का उपचार सर्जरी, आर्थो, न्यूरो, बाल रोग, प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम की निगरानी में चल रहा है। इस हादसे के घायलों के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है। - डॉ. सरोज सिंह, प्राचार्या, एसएन मेडिकल कॉलेज
 

यहां देखिए सभी घायलों की सूची

 एत्मादपुर, आगरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंडी के आलोक भारती स्कूल के बच्चे बस दुर्घटना में घायल हो गए। अस्पताल में ये बच्चे बच्चे और स्टाफ घायल अवस्‍था में भर्ती हैं।

क्रम संख्या        नाम           कक्षा            उम्र           अस्पताल
1.        अभिनव                    7                 12             आकाश हास्पिटल एत्माद्दौला आगरा
2.        सोनिया                     12               17
3.         चिराग                     05               12
4.        मनस्वनी                   10                16
5.          लता                        11               16
6.        कनिका                      09              15              श्री कृष्ण हॉस्पिटल एत्माद्दौला आगरा
7.        जागृति अध्यापक
8.         अविना                        12              17
9.         विशाल अध्यापक
10.        मुस्कान                       07              12
11.        पुष्पराज                      कुक             29
12.        हिमांशु                        06                10
13.        अभिषेक                     -                        -
14.        डिम्पल                      12                 17
15.        जितेन्द्र                        07              13
16.       लाल सिंह                 अध्यापक          29
17.         समीर                          07             12
18.        राकेश                अध्यापक             27
19.        प्रियंका              12                      17
20.        अंजली               10                     13
21.       अन्नदिता              12                    17
22.        अनीता पत्नी प्रधानाचार्य विक्रम सिंह
23.        आहना                  -                      34
24.        संगीता                 अध्यापक            28
25.        जैमिनी              10                       15
26.     राजेन्द्र कुमार             अध्यापक         38
27.         रचना              11           17
28.         अनवी                   08                     -
29.        प्रांचल                     12                      -                      एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा
30.         प्रीति                         -                   16
31.         कंचन                     अध्यापक            -
32.        ओसीन                        -                        -

33.        यासमीन             11             15                           शांति मांगलिक ताजगंज आगरा
34.        सुनीता                11            17
35.        तनीसा                 10          14
36.         महक               05             11
(10 छात्र-छात्राओं और स्टाफ को मामूली चोटें आई हैं)
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दर्द के लिए मरहम-पट्टी, डर का दुलार से उपचार

एक के बाद एक घायल बच्चे एसएन मेडिकल कॉलेज लाए जा रहे थे। दर्द के साथ हादसे से सहमे बच्चों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। ऐसे में डॉक्टरों के लिए इलाज के साथ उनको चुप कराना चुनौती थी। ऐसे में डाक्टर अभिभावक बन गए। कभी पुचकारते तो कभी गले लगाकर सांत्वना देते।

मरहम-पट्टी के बाद जब बच्चों को वार्ड में शिफ्ट किया तो कुछ महिला डॉक्टर उन्हें पुचकारती रहीं। बार-बार सब ठीक है, कहकर दिलासा देतीं। पांच साल की आशीन के कपड़े खून से सने थे। बच्ची खून को देख डर रही थी।

तत्काल वरिष्ठ डॉक्टर ने अपने घर फोन किया और आशीन की हमउम्र अपनी बच्ची के कपड़े मंगवाए। मां खुद घायल थी, ऐसे में बच्ची के कपड़े बदलने का जिम्मा भी डॉक्टरों ने उठाया।

दुलारते-पुचकारते हुए बच्ची को जैसे-तैसे कपडे़ पहनाए। कुछ सामान्य हालात में आने पर बच्चाें के खाने और पीने के लिए डॉक्टर फिक्रमंद दिखे। वार्ड में बच्चों की देखरेख के लिए दो महिला चिकित्सकों को अतिरिक्त रूप से तैनात किया गया।
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