उपायुक्त ने बताया कि यात्रा मार्ग की सुरक्षा और व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों और अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान मनाली के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित की गई थी। टीम ने 8 और 18 जून को यात्रा मार्ग का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार भीमडवारी से पार्वती बाग तक का मार्ग मौजूदा परिस्थितियों में अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण पाया गया है।
विशेषज्ञों ने आगामी मानसून के दौरान भूस्खलन, चट्टानों के गिरने, अचानक जलस्तर बढ़ने, फ्लैश फ्लड और मलबे के बहाव की आशंका जताई है। पर्वतारोहण संस्थान मनाली के स्की इंस्ट्रक्टर अंकुश कुमार और ट्रैकिंग गाइड गोपाल सिंह ने बैठक में स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में श्रीखंड महादेव यात्रा को सुरक्षित नहीं माना जा सकता और इसकी अनुशंसा नहीं की जाती। भीमडवारी और पार्वती बाग के बीच मौजूदा मार्ग के साथ-साथ प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग भी इस समय सुरक्षित नहीं हैं।
किसी दुर्घटना या आपदा की स्थिति में इस क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य चलाना भी बेहद कठिन होगा। विशेषज्ञों ने भीमडवारी के कैंपिंग क्षेत्र को भी उच्च जोखिम वाला बताया है। जहां बढ़ते जल प्रवाह, फ्लैश फ्लड और मलबे के बहाव से गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। संस्थान ने इस प्रभावित हिस्से को हाई रिस्क जोन घोषित करने की अनुशंसा की है। उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन और श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट श्रद्धालुओं की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
मौजूदा स्थिति और विशेषज्ञों की रिपोर्ट को देखते हुए यात्रा का आयोजन जोखिम भरा हो सकता है। ट्रस्ट के सदस्यों से कहा गया है कि यदि उन्हें रिपोर्ट पर कोई आपत्ति या सुझाव हो तो वे अपना लिखित पक्ष तहसीलदार के माध्यम से प्रस्तुत करें। यात्रा को लेकर अंतिम निर्णय सुरक्षा मानकों और सभी संबंधित पहलुओं के गहन परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा। बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने भीमडवारी से पार्वती बाग तक के संवेदनशील क्षेत्र का भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग भी उठाई।