जिला अदालत शिमला ने पंजाब नेशनल बैंक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन लेने के मामले लाभार्थी पुरखू राम और ताशी फुंचोग को दोषी करार दिया है। अब 28 नवंबर को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी। विशेष न्यायाधीश अमन सूद ने सीबीआई के अभियोग का निपटारा करते हुए यह निर्णय सुनाया। सीबीआई की ओर से चार नामित आरोपियों में से अदालत ने दो को दोषमुक्त कर दिया है। कुल्लू जिले की पीएनबी शाखा सुलतानपुर में 1.12 करोड़ रुपये के फर्जी लोन घोटाले में सीबीआई ने चार आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाया था। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच एजेंसी ने 26 किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन की अलग-अलग जांच की और पाया कि बैंक कर्मचारियों की मदद से 1.12 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों के आधार पर अदालत ने पाया कि आरोपी पुरखू राम ने फर्जी जमाबंदी के आधार पर 3.26 लाख रुपये का केसीसी लोन बनवाया था। इस जमाबंदी में आरोपी के नाम 12 बीघे जमीन दर्शायी गई थी। जांच में पाया गया था कि इस जमीन का भार मुक्त प्रमाणपत्र बैंक के वकील ने दिया था। लोन केस को बैंक के अधिकारियों ने स्वीकृत किया और 29 अप्रैल 2011 को सारा पैसा आरोपी के खाते में एकमुश्त जमा किया गया। जांच एजेंसी ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में सबूत पेश किए। अदालत ने सबूतों के आधार पर पाया कि सीबीआई आरोपियों के खिलाफ जुर्म साबित करने में सफल रही है।