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कैबिनेट: आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार ने लिए 50 बड़े फैसले

Thu, 28 Sep 2017 09:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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आचार संहिता लागू होने से पहले बुधवार को सीएम वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 50 बड़े फैसले लिए गए है। महिला कर्मचारियों को लुभाने के लिए मातृत्व अवकाश 135 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया है। बीमार उद्योगों को राहत देने के लिए तीन माह से चल रही कसरत के बावजूद मंत्रिमंडल ने मुहर नहीं लगाई।
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एसएमसी के तहत लगे विशेष शिक्षकों को अनुबंध पर नियुक्त जेबीटी शिक्षकों के बराबर वेतन देने का फैसला भी लिया गया है। मंत्रिमंडल की बैठक में लेफ्ट आउट 1368 पीटीए शिक्षकों को वित्तीय लाभ देने का फैसला भी लिया गया। इन शिक्षकों को वित्तीय लाभ का एरियर भी दिया जाएगा। लेफ्ट आउट पीटीए को अनुबंध शिक्षकों के बराबर मानदेय दिया जाएगा।

 

विभिन्न विभागों में भरे जाएंगे 180 से ज्यादा पद

बैठक में विभिन्न विभागों के विभिन्न श्रेणियों के 180 से ज्यादा पद भरने की मंजूरी दी। इनमें सबसे ज्यादा 50 पद ट्रेजरी विभाग में भरने की मंजूरी दी है। कैबिनेट ने इस विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के 50 पद के अलावा आईपीएच में असिस्टेंट इंजीनियर सिविल के 9, असिस्टेंट इंजीनियर मेकैनिकल के एक, राजकीय फार्मेसी कॉलेज नगरोटा बगवां में असिस्टेंट लाइब्रेरियन का एक, असिस्टेंट प्रोफेसर फार्मेसी के तीन, राजीव गांधी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज नगरोटा बगवां में टीचिंग फैकल्टी के 11 और नॉन टीचिंग के 11 पद भरने को मंजूरी दी है। सोलन, मंडी, सिरमौर, शिमला, बिलासपुर और कुल्लू में अपग्रेड स्कूलों में पद सृजित कर भरे जाएंगे। 

डिग्री कॉलेज पांगी में असिस्टेंट प्रोफेसर के छह पद सृजित करने और असिस्टेंट लाइब्रेरियन का एक पद, मंडी के राजकीय डिग्री कॉलेज थाची में विभिन्न श्रेणी के 18 पद, सिरमौर के राजकीय डिग्री कॉलेज में लाइब्रेरियन का एक पद समेत 18 पद, सिस्टर निवेदिता राजकीय नर्सिंग कॉलेज शिमला में एसोसिएट प्रोफेसर और लेक्चरर का एक-एक पद, राजकीय नर्सिंग कॉलेज नेरचौक के लिए 21 पद, आबकारी एवं कराधान विभाग में ईटीओ के 16 पद भरने, कांगड़ा के रैत स्थित एप्रोप्रिएट टेक्नालॉजी सेंटर में वैज्ञानिक अधिकारी का एक, वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक का एक, डाटा एंट्री ऑपरेटर एक, मास्टर ट्रेनर एक और चपरासी का एक पद भरने को मंजूरी दी। कैबिनेट ने सिस्टर निवेदिता राजकीय नर्सिंग कॉलेज में पे स्ट्रक्चर को रिवाइज करने की भी मंजूरी दी। 

530 पंचायत वैटनरी सहायक अनुबंध पर लिए

मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के तहत 5 वर्ष का सेवाकाल पूरा करने वाले 530 ग्राम पंचायत वैटनरी सहायकों को अनुबंध आधार पर परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। हमीरपुर जिला की ग्राम पंचायत धलचेड़ा के गांव धलचेड़ा तथा ग्राम पंचायत ग्याराग्रां के गांव चम्बेह में प्रत्येक में चार पदों के सृजन सहित नए आयुर्वेद स्वास्थ्य केन्द्र खोलने, मंडी जिला के करसोग में राजकीय बहुतकनीकी संस्थान की स्थापना का निर्णय लिया गया। उरणी में राजकीय पॉलीटेक्निक की स्थापना के लिए मैर्सज हिमाचल बास्पा पॉवर कंपनी के निजी भवन के अधिग्रहण का निर्णय लिया गया।

क्रिकेटर सुषमा को डीएसपी बनाने की मंजूरी
शिमला। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा करते हुए महिला क्रिकेटर सुषमा वर्मा को पुलिस महकमे में डीएसपी नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। भारत की महिला क्रिकेट वर्र्ल्ड कप टीम की विकट कीपर रही सुषमा वर्मा मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र शिमला ग्रामीण सेे है। प्रतिष्ठित खिलाड़ियों के लिए तीन प्रतिशत आरक्षण के तहत सीधी भर्ती से विशेष मामले के तौर पर यह नियुक्ति की गई है।

नेरचौक को दिया लोनिवि का मंडल कार्यालय

मंत्रिमंडल ने मंडी जिले के नेरचौक में लोक निर्माण विभाग का नया मंडल खोलने तथा इस मंडल के संचालन के लिए विभिन्न श्रेणी के 20 पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी। नेरचौक के बल्ह में आवश्यक पदों के सृजन सहित तहसील कल्याण कार्यालय खोलने का निर्णय भी लिया गया।

जिले में आवश्यक स्टाफ  के सृजन सहित पुलिस स्टेशन धर्मपुर के तहत टिहरा में पुलिस पोस्ट खोलने को मंजूरी दी। कांगड़ा के लगडू तथा शिमला जिला के मड़ावग में आवश्यक 12 पदों सहित पुलिस पोस्ट खोलने का निर्णय भी लिया गया। हमीरपुर जिला की उप तहसील गलोड़ को तहसील में स्तरोन्नत करने तथा भोटा में नई उपतहसील खोलने का निर्णय लिया गया। मंडी जिले की करसोग तहसील के खील में नये पटवार वृत्त के सृजन को मंजूरी दी गई।

मंडी जिला के तहत रोसो पटवार वृत्त को सरकाघाट तहसील से बाहर कर उप तहसील टिहरा में शामिल करने तथा पटवार वृत्त गैहरा तथा मड़ी को धर्मपुर तहसील से बाहर कर तहसील संधोल में शामिल करने का निर्णय लिया। कुल्लू जिला के पटवार वृत्तों दलाश तथा कांडा को उप तहसील निथर से बाहर कर आनी तहसील में शामिल करने का फैसला लिया गया।

कांगड़ा, सोलन में खाली प्राथमिक पाठशालाएं

कांगड़ा जिला के शिक्षा खंड धर्मशाला की ग्राम पंचायत भिटालु के कूट गांव में प्राथमिक पाठशाला खोलने की स्वीकृति दी गई। सोलन जिला के शिक्षा खंड नालागढ़ की ग्राम पंचायत भोजपुर के झीड़ीवाला में प्राथमिक पाठशाला खोलने का निर्णय लिया गया।

मंडी जिला के शिक्षा खंड द्रंग दोे के गांव रोपाड़ा, शिक्षा खंड सदर एक के धनोग गांव तथा शिक्षा खंड करसोग दो के कंडी गांव में प्राथमिक पाठशालाएं खोलने को मंजूरी दी गई। सोलन जिला के प्रारंभिक शिक्षा खंड कुठाड़ का विभाजन कर पट्टा महलोग में प्रारंभिक शिक्षा खंड कार्यालय के सृजन का निर्णय भी लिया गया।

एकल बालिका के लिए एक सीट आरक्षित

 राजकीय मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटा सीटों के तहत स्नातकोत्तर (एमडी/एमएस) कोर्स में एकल बालिका के लिए एक सीट आरक्षित करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा चंबा जिला के मसरूंड में आवश्यक स्टाफ  सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का निर्णय भी लिया गया।

मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप कुल्लू जिला के जगातखाना, बागीपुल, ग्राम पंचायत राहणु के उरटू, आनी के लूहरी तथा घाटू में आवश्यक पदों के सृजन सहित प्रत्येक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया।

सोलन जिला की ग्राम पंचायत मांगल के बागा तथा केदार स्वास्थ्य उप केंद्रों को तीन पदों के सृजन सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्तरोन्नत करने और मंडी जिला के स्वास्थ्य उप केंद्र चौक को आवश्यक स्टाफ  सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्तरोन्नत करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रिमंडल ने जिला सोलन, मंडी, सिरमौर, शिमला, बिलासपुर तथा कुल्लू की नव स्तरोन्न्त पाठशालाओं में शिक्षकों के विभिन्न पदों के सृजन व भरने को स्वीकृति प्रदान की गई।

अफसरों की चली, कई एजेंडे रिजेक्ट

सरकार उद्योगों को राहत देने की तैयारी में थी, लेकिन अधिकारियों केअड़ने से मामले लटक गए। आधा दर्जन लटकी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण शुरू नहीं होने से बड़ी कंपनियों को उनके कई सौ करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम लौटाने का मामला भी शासन की विपरीत टिप्पणियों के चलते टालना पड़ा। तीन मंत्रियों की कैबिनेट सब कमेटी के बीमार उद्योगों को राहत देने की रिपोर्ट कैबिनेट में आई, लेकिन अफसर इसको लेकर भी सहमत नहीं थे। 

पांच घंटे चली बैठक, सुजान स्वास्थ्य कारणों से गैरहाजिर
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक पौने तीन बजे शुरू हुई। बैठक में अस्वस्थ होने के चलते कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया शामिल नहीं हुए। पठानिया कैबिनेट के लिए शिमला पहुंचे थे, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। रात आठ बजे कैबिनेट की बैठक खत्म हुई, लेकिन इस दौरान दो बार बैठक रुकी। एक बार मंत्री बाहर भी आए, लेकिन एचआरटीसी के कॉर्पस फंड के एजेंडे पर दोबारा मंथन हुआ। सहमति नहीं बनने पर कैबिनेट बैठक समाप्त कर दी गई।

अदानी को राहत नहीं, उद्योगों को छूट की फाइल लौटाई

सरकार ने अदानी को 280 करोड़ रुपये की अप फ्रंट प्रीमियम दिए जाने के मामले को रिजेक्ट कर दिया है। मंत्रिमंडल बैठक में मामले पर कई मंत्रियों ने एतराज जताया। इसके अलावा एलएनटी, रिलायंस सहित कई कंपनियों को करोड़ों का अप फ्रंट प्रीमियम लौटाने का एजेंडा भी वापस लौटाया गया। बीमार उद्योगों के लिए तीन मंत्रियों की उपसमिति की सिफारिश के बाद भी टैक्स छूट देने वाली फाइल को लौटाया गया। 


सरकार ने बंद पड़े उद्योगों को फिर शुरू करने के लिए टैक्स में छूट देने का निर्णय लिया था। विभाग इस मामले को मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में लाया, लेकिन मंत्रियों ने एकजुटता नहीं दिखाई। ऐसे में मामले को पेंडिंग में डाल दिया गया। हिमाचल में कई उद्योगपति ने अपना कारोबार या तो बंद कर दिया है या फिर कम उत्पाद करना शुरू किया है। कई उद्योगपति ऐसे हैं, जिन्होंने विभाग के पास अपना कारोबार बंद करने को आवेदन किया है। इसे देखते हुए सरकार ने इन्हें टैक्स में छूट देने का फैसला लिया था। 

कैबिनेट बैठक में बाली को झटका

परिवहन मंत्री जीएस बाली एचआटीसी कर्मचारियों को पेंशन देने की फाइल कैबिनेट बैठक में लेकर आए थे। सूत्र बताते हैं कि बाली ने बैठक में एचआरटीसी की वित्तीय स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट रखी और सरकार से कर्मचारियों को पेंशन दिए जाने की हामी भरी।

बैठक में बताया गया कि एचआरटीसी के पेंशन फंड खाली हैं। ऐसी स्थिति में निगम सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देने की स्थिति में नहीं है। सरकार अपने स्तर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन उपलब्ध कराए। बैठक में इस पर सहमति न बनने से मंत्री नाराज हो गए। बताया जा रहा है कि बैठक के बाद बाली अलग से मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिले।

अगली कैबिनेट धर्मशाला में 

चुनाव आचार संहिता से पहले सरकार एक कैबिनेट बैठक और करना चाहती है। सूत्रों की मानें तो कांगड़ा जिले को फोकस करते हुए धर्मशाला में भी कैबिनेट की बैठक हो सकती है। परिवहन मंत्री जीएस बाली का यह सुझाव था।

बताया जा रहा है कि शहरी विकास मंत्री सुधीर भी इससे सहमत थे। कैबिनेट खत्म होने के बाद दोबारा कुछ देर के लिए मंत्री बैठे और अगली कैबिनेट को लेकर चर्चा हुई। हालांकि इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ कि अगली बैठक कब और कहां होगी।

चाय बागानों के लैंड यूज में बदलाव पर मुहर

अदानी ग्रुप सहित जलविद्युत योजनाओं में आधा दर्जन अपफ्रंट प्रीमियम लौटाने का मामला भी शासन की नकारात्मक टिप्पणियों के चलते वापस ले लिया गया। केबिनेट ने चाय बागानों के लैंड यूज में बदलाव पर मुहर लगा दी है। कुछ रसूखदारों को सरकार के इस फैसले से फायदा होगा, लेकिन कांगड़ा चाय उद्योग के लिए यह निर्णय बड़ा झटका हो सकता है। इसके साथ ही कांगड़ा के चाय बागानों की बिक्री का रास्ता सरकार ने साफ कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार सियासी रसूख वाले कुछ चाय बागान मालिकों ने अपने बागानों का लैंड यूज बदल कर उसका कामर्शियल इस्तेमाल करना चाहते हैं। इनकी ओर सरकार को प्रतिवेदन किया गया था। पहले भी मंत्रिमंडल में दो बार आ चुके इस एजेंडे को रिजेक्ट कर दिया गया था। इस बार सरकार ने करीबियों को राहत देते हुए लैंड होल्डिंग और सीलिंग एक्ट के नियम 6 और 7 के तहत उन्हें छूट देने का निर्णय लिया है।

राजस्व विभाग की संस्तुति पर पर्यटन विभाग के माध्यम से ऐसे प्रतिवेदनों का निस्तारण किया जाना है। चाय बागानों का लैंड यूज बदलने की प्रक्रिया में सरकार ने पर्यटन विभाग को शामिल किया है। इससे माना जा रहा है कि जल्द ही कांगड़ा के चाय बागानों में बड़े टूरिस्ट स्पॉट और व्यावसायिक परिसर बन सकेंगे।
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विधायकों को जमीन देने पर भी हुई चर्चा

चुनावी वर्ष में विधायकों व पूर्व विधायकों को पट्टे पर जमीन देने के फैसले पर भी केबिनेट बैठक मेें चर्चा हुई। चर्चा है कि बैठक में परिवहन मंत्री जीएस बाली ने इस मामले को उठाया और प्रस्ताव पर खासी नाराजगी जताई। बाली ने विरोध जताते हुए कहा कि अगर जमीन देनी ही है तो पूर्व सैनिकों की विधवाओं को जमीन देने का प्रावधान हो।

हालांकि मंत्रियों के अलग अलग रुख के चलते मामले पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई और अगले एजेंडे पर बात बढ़ गई। 18 सितंबर को हुई केबिनेट की बैठक में विधायकों व पूर्व विधायकों को पट्टे पर जमीन दिए जाने के फैसले को मंजूरी दी गई थी। बाली समेत सत्तारूढ़ दल के अलावा विपक्ष ने भी इस फैसले पर विरोध जता चुका है।
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