मामि गंगे परियोजना की तर्ज पर मंडी की जीवनदायिनी नदी ब्यास का पुनरुद्धार होगा। इसके लिए डीपीआर पर काम शुरू हो गया है। वानिकी गतिविधियों के माध्यम से ब्यास नदी क्षेत्र का सुधार, संरक्षण और सर्वांगीण विकास किया जाएगा।
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला ने मंगलवार को जिला परिषद सभागार भ्यूली में परामर्श बैठक हुई। इसमें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने पर चर्चा हुई। हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला के मुख्य अरण्यपाल एसपी नेगी ने डीपीआर को लेकर एक संक्षिप्त विवरण दिया।
कहा कि यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसे हिमाचल के मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा और कुल्लू जिलों के बेसिन क्षेत्रों में कार्यान्वित किया जाना है। बैठक में जिला परिषद मंडी की अध्यक्ष सरला ठाकुर ने कहा कि जिला मंडी के लोगों के लिए वनों का बहुत महत्व है।
ब्यास नदी बेसिन के कायाकल्प का विचार अत्यधिक सराहनीय है। वन वृत्त मंडी अरण्यपाल उपासना पटियाल ने नदी के जलस्तर, पानी के निकास, खनन के मुद्दों पर जोर देकर ब्यास नदी के पुनरुत्थान पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने ब्यास के जल ग्रहण क्षेत्रों में कई वानिकी हस्तक्षेप धारणाओं पर जोर दिया, जिससे जिले की प्राकृतिक स्थिति में सुधार करने में मदद मिलेगी। समन्वयक डॉ. वनीत जिष्टु ने एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से डीपीआर की जानकारी दी।
कहा कि यह डीपीआर प्रदेश और पंजाब में वानिकी हस्तक्षेपों पर आधारित है। उन्होंने ब्यास नदी की एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के बारे में भी बताया।