अब बिना पेट्रोल और डीजल के भी हाइड्रोलिक इंजन दौड़ सकेगा। मनाली के एक मेकेनिकल इंजीनियर ने इस तकनीक का ईजाद किया है। वह अपने इस आविष्कार को हाल ही में गुजरात में नेशनल कंपीटीशन फॉर इनोवेटिव एक्सपेरिमेंट में भी प्रदर्शित कर चुका है।
इस सम्मेलन में उन्होंने हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया। इस तकनीक का आविष्कार करने वाले मनाली के खखनाल गांव निवासी मेकेनिकल इंजीनियर अजय कुमार वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कटराईं में ऑटोमोबाइल विषय पढ़ा रहे हैं।
अजय का कहना है कि निर्णायक मंडल ने उनके आविष्कार की सराहना करते हुए इसे व्यावसायिक रूप देने के लिए चयनित किया है। इस नॉन पेट्रोल-नॉन डीजल हाइड्रोलिक इंजन को बाजार में उतारने से पहले इसका पेटेंट कराने की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
इस इनवायरनमेंट फ्रेंडली इंजन से वाहन पेट्रोल-डीजल की जगह हाइड्रोलिक ऊर्जा से भी दौड़ेगा। कटराईं स्कूल के प्रवक्ता पवन ठाकुर को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले 25 वर्षीय मेकेनिकल इंजीनियर अजय कुमार का कहना है कि उन्हें बचपन से ही ऑटोमोबाइल तकनीक से लगाव रहा है।
उन्होंने खखनाल स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद शिमला में आगामी पढ़ाई पूरी की है। अजय की इस सफलता पर कटराईं स्कूल के प्रधानाचार्य ने उन्हें बधाई दी।
यह है तकनीक
तकनीक में क्रेंक मेकेनिज्म को इंप्रूव किया गया है। इसके तहत हाइड्रोलिक प्रेशर से पैदा होने वाली पावर जेनरेटर में जाकर स्वत: पांच गुणा बढ़ जाएगी। यह पावर रिसाइकल होकर बिना पेट्रोल-डीजल के ही हाइड्रोलिक इंजन को चालू रखेगी।