इसमें मोलस्यूसाइडल गुण हैं। हिमालय में आयुर्वेदिक राल शिलाजीत के रॉक फेस कलेक्शन साइटों के पास यूफोरबिया रोलेना को बढ़ते देखा गया है। यह पौधा शिलाजीत की मूल उत्पत्ति है, क्योंकि इसके गोंद में राल के समान संरचना होती है।
ग्रामीण महिलाएं छूहीं के दूध से काजल भी बनाती हैं, जो कि नवजात शिशुओं की आंखों की ज्योति बढ़ाता है। छूहीं को इस्तेमाल में लाते समय इसमें निकलने वाला सफेद पदार्थ आंखों या त्वचा को न लगे।
छूहीं की कोमल शाखाएं छिलके के साथ ही छोटे टुकड़ों में काटी गईं। धोने के बाद शाखाओं के एक किलो टुकड़ों के लिए कड़ाही में दो से चार चम्मच देसी घी गर्म किया गया।
उसमें सौंफ के दो चम्मच, हल्दी पाउडर एक चम्मच और छूहीं की शाखाएं डाली गईं। टुकड़े नरम और पारदर्शी होने तक इसे पकाया। फिर किशमिश और कसा हुआ नारियल डाल कर अच्छी तरह से मिलाकर मीठा पकवान तैयार किया गया।