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हड़ताल का अधिकारी खत्म करने के फैसले से बिफरी बार काउंसिल

Tue, 11 Sep 2018 09:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सुप्रीम कोर्ट के दो सदस्यीय जजों के फैसले के खिलाफ हिमाचल के वकील लामबंद हो गए हैं। वकीलों के हड़ताल पर जाने के अधिकार को खत्म करने के फैसले पर हिमाचल बार काउंसिल बिफर गई है।

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इस फैसले के विरोध में बार काउंसिल ने 17 सितंबर को पूरे प्रदेश में बार एसोसिएशनों की बैठक कर सांसदों, विधायकों, उपायुक्तों सहित मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया है। 

मंगलवार को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बार काउंसिल ऑफ हिमाचल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वकीलों के हितों का हनन हुआ है। केंद्र सरकार इस फैसले की आड़ में अप्रत्यक्ष तौर पर वकीलों पर शिकंजा कसने जा रही है।
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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ से पारित फैसले में कहा गया है कि मजबूरन स्थिति में वकील एक दिन का विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ द्वारा हाल ही में पारित फैसला विधान पालिका को वकीलों के खिलाफ  कानून बनाने के लिए सीधे तौर पर प्रेरित कर रहा है।

इस मामले को लेकर 17 सितंबर को पूरे प्रदेश में वकीलों की ओर से अपनी बार एसोसिएशन में जनरल हाउस करने के बाद इसके विरोध में राज्य स्तर पर प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। 

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हायर एजूकेशन एक्ट का भी किया विरोध

 जिला स्तर पर संासद और जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उपमंडल स्तर पर विधायकों और उपमंडल अधिकारियों को ज्ञापन सौंप कर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसी कड़ी अक्तूबर महीने में दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद देश भर के दो लाख से अधिक वकील सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक मार्च निकालेंगे। इस अवसर पर बार काउंसिल के सदस्य आईएन मेहता, लवनीश कंवर और अजय शर्मा भी मौजूद रहे।

बार काउंसिल ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे हायर एजूकेशन कमीशन आफ इंडिया एक्ट 2018 का भी विरोध  किया है। काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कहा कि इस एक्ट को लाकर केंद्र सरकार विभिन्न तरह के शिक्षण संस्थानों को अपने अधीन लाने के प्रयास कर रही है।

इस एक्ट के आने से यूजीसी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। बार काउंसिल आफ हिमाचल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त होने वाले जजों को सेवानिवृत्ति के बाद पोस्टिंग देने का विरोध किया है।

काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कहा कि देश की विभिन्न अदालतों में काम करने वाले वकील भी बहुत काबिल हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद जजों को ही नियुक्तियां देना गलत है। इस प्रथा के बंद होने से न्यायिक व्यवस्था में निष्पक्ष फैसले आ सकेंगे।
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