हिमाचल बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव प्रेम वर्मा ने बताया कि बैंकों के पारस्परिक विलय के विरोध में यह हड़ताल की जा रही है। सभी अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यह विलय देश हित और कर्मचारियों के हित में नहीं है।
सरकार बैंकों को निजीकरण की ओर धकेल रही है। विश्व के अन्य देशों के मुकाबले भारत में बैंकिंग सेक्टर के विस्तार की बहुत अधिक संभावनाएं हैं। देश के हजारों गांव आज भी बैंक सुविधा से महरूम हैं। केंद्र सरकार जन धन योजना के दूसरे चरण को शुरू करने की तैयारी में है।
इससे स्पष्ट है कि देश के लाखों लोगों तक अभी तक बैंकों की सुविधा नहीं पहुंची है। वर्मा ने कहा कि इस हड़ताल के बाद भी अगर केंद्र सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो बैंक यूनियन संघर्ष को और तेज करने को विवश होगी।