इससे पौधों की अच्छी देखभाल होगी। जड़ें मजबूत होंगी और तीन से चार फीट के पौधे लगाने के बाद वे सुरक्षित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व वन विभाग जिन पौधों को बरसात में जंगलों में लगाता था, उनकी ऊंचाई मात्र 6 से 10 इंच तक होती थी।
ऐसे में वन विभाग द्वारा लगाए गए छोटे पौधे जहां झाड़ियों और घास में दबकर खत्म हो जाते थे वहीं लोगों द्वारा घास काटते वक्त भी इन छोटे पौधों को घास के साथ काट दिया जाता था। जो पौधे बचते थे, उनमें से कई जंगलों में आग की वजह से नष्ट हो जाते हैं।
प्रदेश में वन विभाग हर साल जंगलों में लाखों पौधे लगाता है। इनमें से करीब 50 फीसदी से अधिक पौधे विभिन्न कारणों से नष्ट हो जाते हैं। इस वर्ष राज्य सरकार ने विशेष अभियान के दौरान 12 से 14 जुलाई तक विभिन्न जिलों में तीन दिन में ही 15 लाख पौधे लगा दिए थे।
पौधरोपण के चार साल बाद होती है गणना
वन विभाग पौधरोपण के चार साल बाद पौधों की गणना करता है। अगर 60 फीसदी पौधे सही पाए जाते हैं तो पौधरोपण को सफल माना जाता है। लेकिन अधिकांश मामलों में यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता था, जिस कारण पौधरोपण के बाद करीब 50 फीसदी पौधे ही बच पाते थे। बड़े पौधे लगाने से 70 से 80 फीसदी पौधों के बचने की उम्मीद की जा रही है।